जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' की अवधि क्या है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की अवधि सामान्यतः 7 वर्ष से 11 वर्ष तक मानी जाती है। इस अवस्था में बच्चों के भीतर तार्किक चिंतन का विकास शुरू हो जाता है, विशेष रूप से ठोस या मूर्त वस्तुओं और घटनाओं के संदर्भ में। वे संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण (Classification), और उत्क्रमणीयता (Reversibility) जैसे मानसिक गुणों को भली-भांति समझ लेते हैं। इस प्रकार, विकल्प (c) बिल्कुल सही और प्रामाणिक उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पियाजे की प्रथम अवस्था 'संवेदी गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage) जन्म से 2 वर्ष तक होती है।
- दूसरी अवस्था 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) 2 से 7 वर्ष तक होती है।
- तीसरी अवस्था 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) 7 से 11 वर्ष की होती है, जिसमें बालक मूर्त तार्किक संक्रियाएं करने योग्य बनता है।
- चौथी और अंतिम अवस्था 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) 11 वर्ष से वयस्कता तक होती है जिसमें अमूर्त चिंतन का विकास होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे ने बाल विकास को चार चरणों में विभाजित किया है जिसे जीन पियाजे का सिद्धांत कहा जाता है। यह बाल केंद्रीय शिक्षा और संज्ञानात्मक मनोविज्ञान की नींव है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET) में जीन पियाजे की अवस्थाओं और उनकी विशेषताओं से संबंधित प्रश्न लगभग हर बार पूछे जाते हैं। 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' में बच्चों की समस्या समाधान क्षमता में अमूर्तता का अभाव होता है लेकिन वे भौतिक रूप से उपस्थित वस्तुओं पर तार्किक ऑपरेशन कर सकते हैं। शिक्षकों को इस स्तर के बालकों को पढ़ाने के लिए मूर्त शिक्षण सामग्री (Concrete Teaching Learning Materials - TLM) का प्रयोग करना चाहिए ताकि उनकी अवधारणाएं स्पष्ट हो सकें।