संज्ञानात्मक विकास
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रिचर्ड आत्मकेंद्रित और संज्ञानात्मक विकास के अंतर्गत डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठनकर्ता या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस pedagogical पेडागोजी तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नए आने वाले सूचना-समुच्चय को जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त परिचयात्मक सामग्री (Introductory Material) प्रस्तुत करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा निर्माण, अवधारण और सार्थक ज्ञान-संरचना के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से डेविड औसुबेल (David Ausubel) का 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) अत्यधिक महत्वपूर्ण है। औसुबेल के अनुसार, अधिगम तब सबसे अधिक सार्थक होता है जब नया ज्ञान शिक्षार्थी के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से उपस्थित विचारों के साथ तार्किक रूप से जुड़ता है। इसे 'अवकलन या सबसमप्शन' (Subsumption) कहा जाता है। 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer) वे अमूर्त और उच्च-स्तरीय परिचयात्मक सामग्रियां हैं जिन्हें मुख्य पाठ से पहले प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह नए ज्ञान और पूर्व-ज्ञान के बीच 'संज्ञानात्मक सेतु' का काम कर सके। अतः विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय के वास्तविक निहितार्थ को सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है।
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जॉन डीवी (John Dewey) और प्रयोगात्मक शिक्षाशास्त्र के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'चिंतनशील चिंतन या रिफ्लेक्टिव थिंकिंग' (Reflective Thinking)**—जिसे उस सक्रिय, निरंतर और तार्किक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी किसी विश्वास या ज्ञान के रूप में स्वीकृत आधार को उसके साक्ष्यों और अंतःनिहित परिणामों के संदर्भ में गहराई से जाँचता है, तथा समस्या-समाधान के लिए अपने अनुभवों को पुनर्गठित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक दृष्टिकोण, अनुभव आधारित ज्ञान और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण या डीसेंट्रेश्न' (Decentration)**—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु, घटना या समस्या के केवल एक ही आयाम, पहलू या दृश्य पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रित होने यानी Centration) के बजाय उसके एक से अधिक पहलुओं, गुणों या दृष्टिकोणों पर एक साथ विचार करने और उनके बीच मानसिक समन्वय स्थापित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक संरक्षण (Conservation), बहु-आयामी चिंतन और संक्रियात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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