संज्ञानात्मक विकास
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जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और शिक्षण सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development and Instruction) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अन्वेषण अधिगम या खोज अधिगम' (Discovery Learning)—जिसे उस अधिगम उपागम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी को पूर्व-निर्मित या पक्की सामग्रियां रटाने के बजाय एक ऐसा संवर्धित, समस्या-उन्मुख और अन्वेषणात्मक वातावरण प्रदान किया जाता है जहाँ वह स्वयं तथ्यों, सिद्धांतों और अवधारणाओं के बीच अंतर्संबंधों की खोज करते हुए अपने ज्ञान का सक्रिय निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक प्रबोधन, आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) और अर्थपूर्ण ज्ञान सृजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के संज्ञानात्मक सिद्धांत के अनुसार 'अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) रचनावाद (Constructivism) की नींव पर आधारित है। इसके अंतर्गत शिक्षार्थी को सूचनाएं सीधे परोसने के बजाय एक ऐसा परिवेश दिया जाता है जहाँ वह स्वयं समस्याओं का समाधान ढूंढता है, प्रयोग करता है और अवधारणाओं की खोज करता है। इससे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल और आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) का सुदृढ़ विकास होता है, जो MPTET और CTET परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानववादी मनोविज्ञान' (Humanistic Psychology) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पूर्णतः कार्यशील व्यक्ति' (Fully Functioning Person) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपने अनुभवों के प्रति खुलापन, अस्तित्वगत जीना (Existential Living), अपने जीव पर भरोसा रखना, अनुभवात्मक स्वतंत्रता और रचनात्मकता जैसे लक्षणों का प्रदर्शन करते हुए अपनी पूरी मनोवैज्ञानिक क्षमता को आत्मसात करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-स्वीकार, आंतरिक अभिप्रेरणा और भय-मुक्त वातावरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी अभिप्रेरणा सिद्धांत' या 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च और अंतिम मनोवैज्ञानिक अवस्था—'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)—जिसे उस अद्वितीय मानसिक और व्यक्तिगत स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति अपनी पूर्ण आंतरिक क्षमताओं, सृजनात्मक संभावनाओं, प्रतिभाओं और व्यक्तिगत विकास की चरम सीमा को प्राप्त कर लेता है तथा समाज या बाहरी दुनिया से परे अपने अस्तित्व के वास्तविक उद्देश्य को समझकर उसका प्रकटीकरण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तिगत विकास, आंतरिक प्रेरणा के उच्चीकरण और स्वायत्त सृजनात्मकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation) अर्थात् 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत सर्वोच्च शिखर पर प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, सृजनात्मकता, और वास्तविक पोटेंशियल का पूरी तरह से विकास कर लेता है, जब उसकी शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान जैसी सभी न्यूनता संबंधी आवश्यकताएं (Deficiency Needs) संतुष्टि पा लेती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, आंतरिक प्रेरणा और स्व-अन्वेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)—जिसे उस उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-conventional Level) के चरण के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति कानून और नियमों को एक कठोर और अपरिवर्तनीय सत्य मानने के बजाय इस बात पर बल देता है कि नियम लोकतांत्रिक सहमति, मानवीय अधिकारों और समाज के कल्याण के लिए लचीले ढंग से बनाए और सुधारे जाने चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक दृष्टिकोण, नैतिक तर्कणा (Moral Reasoning) और न्यायपरक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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