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अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
बुद्धि, व्यक्तित्व एवं सृजनशीलता सभी देखें (925) बुद्धि: अवधारणा एवं सिद्धांत212 गार्डनर: बहुबुद्धि301 संवेगात्मक बुद्धि (EQ)11 बुद्धि परीक्षण (IQ)65 व्यक्तित्व: सिद्धांत एवं प्रकार219 व्यक्तित्व मापन एवं परीक्षण24 सृजनशीलता (Creativity)92 अभिक्षमता, अभिवृत्ति एवं अभिरुचि1
वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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अल्बर्ट बंडूरा
Asked 3 सप्ताह पहले · Viewed 2,983 times
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-प्रभावीकारिता' (Self-Efficacy)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी विशिष्ट परिस्थितियों में किसी कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और अभीष्ट परिणामों को प्राप्त करने की अपनी स्वयं की क्षमताओं पर कितना भरोसा करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रेरणा स्तर, चुनौती-सामना करने की क्षमता और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत (जो बाद में सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत बन गया) में 'आत्म-प्रभावीकारिता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय संप्रत्यय है। इसका तात्पर्य व्यक्ति के उस विश्वास से है कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में अपेक्षित प्रदर्शन कर सकता है। उच्च आत्म-प्रभावीकारिता वाले विद्यार्थी कठिन कार्यों को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं, असफल होने पर अपनी रणनीतियों की समीक्षा करते हैं और अपनी आंतरिक क्षमताओं पर संदेह करने के बजाय निरंतर प्रयास करते रहते हैं। इसके विपरीत, निम्न आत्म-प्रभावीकारिता वाले छात्र कठिन कार्यों से दूर भागते हैं और अपनी विफलता का कारण अपनी सीमित योग्यता को मानते हैं। अतः विकल्प (अ) इस अवधारणा का सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से मान्य विवरण प्रस्तुत करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • बंडूरा के अनुसार आत्म-प्रभावीकारिता के चार प्रमुख स्रोत हैं: मास्टर अनुभव (Mastery experiences), vicarious experiences (अनुकरणीय अनुभव), मौखिक प्रोत्साहन (Verbal persuasion), और शारीरिक/संवेगात्मक अवस्थाएँ।
  • विकल्प (ब) गलत है क्योंकि आत्म-प्रभावीकारिता कोई स्थिर या आनुवंशिक रूप से फिक्स गुण नहीं है, इसे अनुभवों और शिक्षण से बदला जा सकता है।
  • विकल्प (स) गलत है क्योंकि निम्न आत्म-प्रभावीकारिता वाले छात्र सफलता का श्रेय भाग्य को और असफलता का श्रेय अपनी योग्यता को देते हैं।
  • विकल्प (द) गलत है क्योंकि आत्म-प्रभावीकारिता का संबंध संज्ञानात्मक, भावनात्मक और शैक्षणिक प्रदर्शन से भी गहरा है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: अल्बर्ट बंडूरा का यह सिद्धांत अवलोकन संबंधी अधिगम, मॉडलिंग और पारस्परिक निर्धारकता (Reciprocal Determinism) पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत का अध्ययन करें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में विद्यार्थियों की आत्म-प्रभावीकारिता को बढ़ाना शिक्षक का प्रमुख दायित्व है। जब शिक्षक छात्रों को छोटे-छोटे और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य देते हैं तथा रचनात्मक फीडबैक प्रदान करते हैं, तो छात्रों का अपनी क्षमताओं पर विश्वास मजबूत होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस संप्रत्यय से जुड़े प्रश्न अक्सर परिदृश्य आधारित (Scenario-based) होते हैं, जहाँ छात्र की प्रेरणा और बाधाओं से निपटने की उसकी क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। बंडूरा का यह सिद्धांत कक्षा प्रबंधन और समावेशी शिक्षा में भी अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होता है।

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→ अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पारस्परिक निर्धारणवाद' (Reciprocal Determinism) की अवधारणा—जिसके तहत किसी व्यक्ति का व्यवहार (Behavior), उसकी आंतरिक व्यक्तिगत और संज्ञानात्मक प्रक्रियाएं (Person/Cognitive Factors), और उसका बाहरी पर्यावरणीय प्रभाव (Environment) एक-दूसरे को लगातार और त्रिपक्षीय (Triadic) रूप से प्रभावित करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), अवलोकनजन्य अधिगम और सकारात्मक प्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभाویता' (Self-Efficacy)—जिसके तहत किसी व्यक्ति का यह व्यक्तिगत विश्वास शामिल होता है कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने, किसी कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को सफलतापूर्वक आयोजित और निष्पादित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, शैक्षणिक लचीलेपन और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? 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