संज्ञानात्मक विकास
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'करके सीखना' (Learning by Doing)—जिसे उस व्यावहारिक और सक्रिय अधिगम दर्शन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी केवल निष्क्रिय श्रोता के रूप में ज्ञान ग्रहण नहीं करते, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, परियोजनाओं और सामाजिक अंतःक्रियाओं में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर अपने अनुभवों के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान और व्यावहारिक कौशल के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जॉन डीवी का 'करके सीखना' (Learning by Doing) प्रगतिशील शिक्षा का आधार है। इसके अनुसार, वास्तविक अधिगम तब होता है जब छात्र सक्रिय रूप से अपने अनुभवों के माध्यम से समस्याओं का समाधान करते हैं। यह सिद्धांत सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक जीवन से जोड़ता है और विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, लोकतांत्रिक दृष्टिकोण तथा दीर्घकालिक स्मृति का विकास करता है। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से परिभाषित करता है।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of…
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'स्मृति और विस्मरण के सिद्धांतों' (Theories of Memory and Forgetting) के संदर्भ में, हरमन एबिंगहॉउस (Hermann Ebbinghaus) द्वारा प्रतिपादित 'विस्मरण वक्र' (Forgetting Curve) और 'निरर्थक शब्दांशों' के प्रयोग से जुड़े मात्रात्मक विश्लेषण के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा जॉन ब्रॉडस वॉटसन (John B. Watson) और इवान पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन से इतर, हर्बर्ट साइमन (Herbert Simon) तथा रिचर्ड एटलकिन (Richard Atkinson) और रिचर्ड शिफ्रिन (Richard Shiffrin) द्वारा प्रतिपादित 'सूचना प्रक्रमण मॉडल' (Information Processing Model) के तीन प्रमुख घटकों—'संवेदी स्मृति' (Sensory Memory), 'अल्पकालिक स्मृति/कार्यकारी स्मृति' (Short-term/Working Memory), और 'दीर्घकालिक स्मृति' (Long-term Memory)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्कैलकुलिया' (Dyscalculia - गणितीय और संख्यात्मक प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सल्कास' (Intraparietal Sulcus - IPS: संख्यात्मक परिमाण और स्थानिक-संख्यात्मक प्रतिनिधित्व का मुख्य केंद्र), 'बाएँ गोलार्ध का एंगुलर गाइरस' (Left Angular Gyrus - मौखिक गणितीय तथ्यों और प्रतीकों का पुनर्प्राप्ति), तथा 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex - कार्यकारी कार्य, कार्यशील स्मृति और गणितीय रणनीतियों का चयन) के बीच दोषपूर्ण न्यूरोनल कनेक्टिविटी, संख्यात्मक प्रसंस्करण में बाधा, और व्हाइट मैटर ट्रैक्ट्स के कम माइलिनेशन की सक्रियण गतिकी, तथा मारिया मोंटेसरी के 'मल्टीसेंसरी मैथमैटिकल मैटेरियल्स' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्कैलकुलिया ऑप्टिमाइज्ड म्यूटसेंसरी न्यूमेरिक पेडागोजी' (Neuro-Dyscalculia Optimized Multisensory Numeric Pedagogy) और विद्यार्थियों में संख्यात्मक प्रवाह, तार्किक-गणितीय समझ व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बुद्धि की संरचना (Structure of Intellect - SOI) के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बुद्धि के त्रि-आयामी (Structure of Intellect) मॉडल का प्रतिपादन जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा किया गया था, जिन्होंने मानसिक क्षमताओं को तीन स्वतंत्र आयामों - विषय-वस्तु (Contents), संक्रियाएँ (Operations), और उत्पाद (Products) में वर्गीकृत किया है।
2. गिलफोर्ड के प्रारंभिक मॉडल के अनुसार, बुद्धि कुल 4×5×6 = 120 स्वतंत्र बौद्धिक कारकों (Factors) से मिलकर बनी थी, जिसे बाद में संशोधित करके कुल 150 और अंततः 180 कारकों तक विस्तारित किया गया।
3. इस सिद्धांत के अंतर्गत 'विषय-वस्तु' (Contents) आयाम के भीतर सांकेतिक (Symbolic), प्रतीकात्मक, व्यवहारपरक (Behavioral) और आकृतिक (Figural) जैसी मानसिक सामग्रियां शामिल होती हैं, जिन पर मस्तिष्क की संक्रियाएँ कार्य करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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'बुद्धि के संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा 1967 में प्रतिपादित त्रि-आयामी सिद्धांत (3D Model of Intellect) के अनुसार, बौद्धिक योग्यताओं को तीन स्वतंत्र आयामों—विषय-वस्तु (Contents), संक्रियाएँ (Operations), और उत्पाद (Products)—में वर्गीकृत किया गया है। गिलफोर्ड के इस संशोधित और विस्तारित मॉडल में इन तीनों आयामों के अंतर्गत उप-श्रेणियों (Sub-divisions) की कुल संख्या क्रमशः कितनी है, जिसके आधार पर कुल 180 प्रकार की बौद्धिक क्षमताओं का निर्माण होता है?
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रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संप्रत्यय अधिगम' (Concept Learning)—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी विभिन्न वस्तुओं, घटनाओं या उद्दीपकों के विशिष्ट और अमूर्त गुणों के आधार पर उनके सामान्य वर्गों (General Classes) या श्रेणियों की पहचान करता है तथा उनके बीच अंतर करना सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वर्गीकरण कौशल, अमूर्त चिंतन और तार्किक श्रेणीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के 'द्वि-कारक बुद्धि सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'सामान्य बुद्धि या जी-कारक' (General Intelligence - 'g' Factor)—जिसे उस सार्वभौमिक, जन्मजात और अपरिवर्तनीय मानसिक ऊर्जा या क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जो व्यक्ति के जीवन के सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों, तार्किक समस्याओं और संज्ञानात्मक प्रदर्शनों में अनिवार्य रूप से समान रूप से उपस्थित रहती है और नियंत्रित करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अकादमिक योग्यताओं, मानसिक क्षमता के मूल्यांकन और बौद्धिक भिन्नताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory or Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)—जिसे उस मानसिक स्थानिक प्रतिनिधित्व (Mental Spatial Representation) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने भौतिक या वैचारिक पर्यावरण के लेआउट, मार्गों, लक्ष्यों और वैकल्पिक रास्तों का एक आंतरिक ढांचा या नक्शा अपने मस्तिष्क में निर्मित करता है, न कि केवल यांत्रिक उत्तेजना-अनुक्रिया (S-R) बंधनों के आधार पर सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक चिंतन, समग्र अधिगम (Holistic Learning) और लचीली समस्या-समाधान क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अ अधिगम के अनुक्रमिक सोपान सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)—जिसे उस सर्वोच्च और अंतिम संज्ञानात्मक स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी पहले से सीखे गए नियमों, सिद्धांतों और कौशलों (Rule Learning) का उपयोग करके किसी नवीन, जटिल और अपरिचित समस्या का तार्किक एवं विश्लेषणात्मक समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, सृजनात्मक चिंतन और बौद्धिक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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