बुरुस फ्रेडरिक स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आंशिक सुदृढ़ीकरण अनुसूची' (Partial / Intermittent Reinforcement Schedule)—जिसे उस अधिगम प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत प्रत्येक सही अनुक्रिया पर सुदृर्र्क (Reinforcer) देने के बजाय, निश्चित या अनिश्चित समय अंतरालों या प्रतिक्रियाओं की संख्या के बाद सुदृढ़ीकरण प्रदान किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यवहार के विलोपन के प्रति प्रतिरोध (Resistance to Extinction), दीर्घकालिक प्रेरणा और निरंतर अभ्यास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुर्लुस फ्रेडरिक स्किनर (B. F. Skinner) के क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) सिद्धांत में 'आंशिक या अंतराली सुदृढ़ीकरण अनुसूची' (Partial / Intermittent Reinforcement Schedule) एक केंद्रीय अवधारणा है। इस सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वांछित व्यवहार या प्रतिक्रिया को प्रत्येक बार के स्थान पर कभी-कभार (निश्चित या अनिश्चित समय अंतराल अथवा अनुक्रियाओं की संख्या के बाद) सुदृढ़ किया जाता है, तो इसे आंशिक सुदृढ़ीकरण कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ यह है कि इसके द्वारा स्थापित अधिगम और अनुबंधित व्यवहार विलोपन (Extinction) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधक (Resistance to Extinction) होते हैं। चूँकि विद्यार्थियों को यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं होता कि अगली बार पुरस्कार या प्रशंसा कब मिलेगी, इसलिए वे अनिश्चितता और जिज्ञासा के कारण लंबे समय तक उस व्यवहार को जारी रखते हैं। यही कारण है कि यह कक्षा-कक्षीय शिक्षण में दीर्घकालिक प्रेरणा (Long-term Motivation) और सतत अभ्यास को बनाए रखने के लिए सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से मान्य तरीका माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- निरंतर बनाम आंशिक सुदृढ़ीकरण: निरंतर सुदृढ़ीकरण से अधिगम आरंभिक चरणों में तीव्र होता है, लेकिन विलोपन भी उतनी ही तेजी से होता है; जबकि आंशिक सुदृढ़ीकरण में विलोपन के प्रति उच्च प्रतिरोध क्षमता पाई जाती है।
- विकल्प 'ए' का विश्लेषण: यह कथन भ्रामक है क्योंकि आंशिक सुदृढ़ीकरण से आरंभिक अधिगम दर धीमी हो सकती है और यह अवांछित व्यवहार को समाप्त करने का एकमात्र साधन नहीं है।
- विकल्प 'बी' का विश्लेषण: सुदृढ़कर्ता के प्रति संतृप्ति (Satiation) मुख्य रूप से निरंतर सुदृढ़ीकरण में उत्पन्न होती है, आंशिक सुदृढ़ीकरण में नहीं।
- विकल्प 'डी' का विश्लेषण: स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत व्यवहारवादी दृष्टिकोण पर आधारित है और यह संज्ञानात्मक विकास के चरणों (जैसे पियाजे का सिद्धांत) से सीधे तौर पर सीमित नहीं है, अतः यह कथन गलत है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्किनर ने चूहों और कबूतरों पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि सुदृढ़ीकरण की अनुसूचियाँ (स, निश्चित अंतराल, अनिश्चित अंतराल, निश्चित अनुपात, अनिश्चित अनुपात) प्राणी के व्यवहार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत देखें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB, BPSC TRE) में स्किनर के अधिगम सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक परिस्थितियों और कक्षा-कक्षीय अनुप्रयोगों पर आधारित होते हैं। 'आंशिक सुदृढ़ीकरण' का यह प्रश्न विद्यार्थियों की प्रेरणा (Motivation) और विलोपन प्रतिरोध (Resistance to Extinction) के व्यावहारिक पक्ष को परखता है। शिक्षकों को कक्षा में हमेशा निरंतर प्रशंसा के बजाय आंशिक और अप्रत्याशित सुदृढ़ीकरण का उपयोग करना चाहिए ताकि छात्रों में आंतरिक अभिप्रेरणा बनी रहे और वे बिना पुरस्कार के भी सीखने के प्रति तत्पर रहें। यह दृष्टिकोण रटन विद्या के स्थान पर स्थायी व्यवहार परिवर्तन पर बल देता है।