चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के 'बुद्धि के द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'सामान्य बुद्धि या जी-कारक' (General Intelligence / g-factor)—जिसे उस सार्वभौमिक और अंतर्जात मानसिक ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया जाता है जो व्यक्ति के सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों, तार्किक विश्लेषण, समस्या-समाधान और संज्ञानात्मक गतिविधियों में अनिवार्य रूप से समान रूप से उपस्थित रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक निष्पादन, बौद्धिक क्षमता के सामान्यीकरण और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) द्वारा 1904 में प्रतिपादित 'बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) मनोविज्ञान के इतिहास में एक मील का पत्थर है। स्पीयरमैन के अनुसार, मानवीय बुद्धि मुख्य रूप से दो कारकों से मिलकर बनी होती है—सामान्य कारक या 'जी-कारक' (g-factor) और विशिष्ट कारक या 'एस-कारक' (s-factor)। यहाँ 'जी-कारक' को एक सार्वभौमिक, अंतर्जात और व्यापक मानसिक ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया गया है जो व्यक्ति के मस्तिष्क में जन्मजात रूप से मौजूद होती है और जीवन के लगभग सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों, तार्किक विश्लेषण, अमूर्त चिंतन और संज्ञानात्मक समस्याओं के समाधान में समान रूप से सक्रिय रहती है। विकल्प (b) इस बात की पुष्टि करता है कि यद्यपि जी-कारक जन्मजात और अपेक्षाकृत स्थिर होता है, तथापि एक अनुकूल और समृद्ध कक्षा-वातावरण विद्यार्थियों को उनकी अधिकतम बौद्धिक क्षमता तक पहुँचने में सहायता करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जी-कारक (g-factor): यह सामान्य मानसिक ऊर्जा है, जो सभी प्रकार की मानसिक गतिविधियों में अनिवार्य रूप से शामिल होती है। यह वंशानुक्रम (Heredity) से अधिक प्रभावित होती है।
- एस-कारक (s-factor): यह विशिष्ट योग्यताओं से संबंधित होता है (जैसे संगीत, कला, गणितीय कौशल) जिसे पर्यावरण और प्रशिक्षण के माध्यम से अर्जित या विकसित किया जा सकता है।
- विकल्प 'a' का खंडन: जी-कारक कोई अर्जित या विषय-विशेष कौशल नहीं है जिसे आसानी से बदला जा सके; यह सार्वभौमिक होता है।
- विकल्प 'c' और 'd' का खंडन: जी-कारक का संबंध केवल शारीरिक परिपक्वता या थकान से नहीं है, और इसका उपयोग बच्चों के स्थायी और नकारात्मक वर्गीकरण के लिए वर्जित है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में बुद्धि के संरचनात्मक मॉडलों का अध्ययन करते समय स्पीयरमैन का सिद्धांत आधारशिला बनता है। इसके विस्तृत अध्ययन हेतु आप जीन पियाजे का सिद्धांत या बुद्धि के विभिन्न सिद्धांतों के अनुभाग का संदर्भ ले सकते हैं, जो संज्ञानात्मक विकास की रूपरेखा को स्पष्ट करते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में स्पीयरमैन के द्विकारक सिद्धांत से संबंधित प्रश्न अक्सर 'g-factor' की प्रकृति (अंतर्जात बनाम अर्जित) और उसकी कक्षा-कक्षीय उपयोगिता पर आधारित होते हैं। परीक्षार्थियों को यह समझना आवश्यक है कि यद्यपि जी-कारक जन्मजात मानसिक क्षमता को दर्शाता है, एक आधुनिक समावेशी कक्षा में शिक्षक का यह दायित्व है कि वह विभिन्न प्रकार की शिक्षण रणनीतियों (जैसे मचान/Scaffolding, विभेदित निर्देश/Differentiated Instruction) का उपयोग करके विद्यार्थियों की इस सामान्य मानसिक क्षमता का अधिकतम सकारात्मक दोहन करें। बच्चों को उनकी जन्मजात योग्यताओं के आधार पर लेबल या वर्गीकृत करना बाल-केंद्रित शिक्षा के सिद्धांतों के विरुद्ध है। अतएव, विकल्प (b) सबसे अधिक तार्किक और मनोवैज्ञानिक रूप से सटीक उत्तर है।