नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) के 'प्रोग्राम्ड लर्निंग एंड शेड्यूल्ड इंस्ट्रक्शन' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन या ब्रांचिंग प्रोग्राम्ड लर्निंग' (Branching Programmed Instruction)—जिसे उस उन्नत अनुदेशनात्मक तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी की व्यक्तिगत भिन्नताओं और प्रत्येक चरण पर उसके उत्तर के तार्किक विश्लेषण के आधार पर उसे विभिन्न उप-शाखाओं या उप-मार्गों (Alternative Paths) की ओर निर्देशित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching), स्व-गति आधारित अधिगम (Self-paced Learning) और व्यक्तिगत भिन्नताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) द्वारा प्रतिपादित 'शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन' (Branching Programmed Instruction), जिसे 'intrinsic programming' भी कहा जाता है, व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) के वैज्ञानिक संचालन पर आधारित है। बी.एफ. स्किनर के रेखीय अनुदेशन के विपरीत, क्राउडर का यह मॉडल बहु-विकल्पीय प्रश्नों (Multiple Choice Questions) का उपयोग करता है। जब शिक्षार्थी किसी प्रश्न का सही उत्तर देता है, तो उसे अगले मुख्य चरण पर भेज दिया जाता है; किंतु यदि शिक्षार्थी गलत उत्तर चुनता है, तो उसे एक विशिष्ट उप-शाखा (Sub-branch) या उपचारात्मक मार्ग पर भेजा जाता है। इस उप-मार्ग पर उसे उसकी त्रुटि का कारण समझाया जाता है और पुनः मुख्य धारा में लौटने से पहले सुधारात्मक अभ्यास कराया जाता है। इस प्रकार विकल्प (b) इस विधि के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थों और उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) के उद्देश्यों को पूर्णतः सटीक रूप से व्याख्यायित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- शाखीय अनुदेशन के जनकॉर्मन क्राउडर हैं, जबकि रेखीय अनुदेशन के जनक बी.एफ. स्किनर हैं।
- यह पद्धति बहु-विकल्पीय प्रारूप का उपयोग करती है और प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत क्षमता व त्रुटियों के आधार पर मार्ग निर्धारित करती है।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि यह रेखीय अनुदेशन की विशेषताओं का वर्णन करता है न कि शाखीय अनुदेशन की।
- विकल्प (c) और (d) क्रमशः शिक्षक-केंद्रित और गलत सामाजिक अंतःक्रिया दावों के कारण पूरी तरह असत्य हैं, क्योंकि यह उपागम पूर्णतः छात्र-केंद्रित (Learner-centric) और स्व-गति आधारित (Self-paced) होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में अभिक्रमित अधिगम (Programmed Learning) का सिद्धांत छात्रों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझते हुए उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करने का एक प्रभावी साधन है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और व्यक्तिगत भिन्नता के सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET) में अभिक्रमित अनुदेशन के विभिन्न प्रकारों—रेखीय (Linear - Skinner), शाखीय (Branching - Crowder) और मैथेटिक्स (Mathetics - Thomas Gilbert)—पर बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। क्राउडर के मॉडल की मुख्य विशेषता यह है कि यह शिक्षार्थी को केवल सही उत्तर तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसकी गलतियों को सीखने के एक सुनियोजित अवसर के रूप में उपयोग करता है। कक्षा-कक्षीय परिस्थितियों में जहाँ विविध पृष्ठभूमि और क्षमता वाले बच्चे (Inclusive Classroom) मौजूद होते हैं, वहाँ इस प्रकार की तकनीक शिक्षकों को प्रत्येक छात्र की विशिष्ट त्रुटियों का निदान (Diagnostic Testing) करने और तदनुसार उपचारात्मक उपाय (Remedial Measures) करने में सहायता प्रदान करती है।