BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
6 views

15 अगस्त 1947 को जब भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई, तब महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में किस पद पर आसीन थे?

Detailed Explanation

15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य ही नहीं थे।

  • कांग्रेस की सदस्यता से त्यागपत्र: महात्मा गांधी ने अक्टूबर 1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे कभी दोबारा पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं बने।
  • कारण: वे रचनात्मक कार्यों (जैसे अस्पृश्यता निवारण, खादी प्रचार, ग्रामोद्योग और बुनियादी शिक्षा) पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते थे। उनका मानना था कि उनके पार्टी में सक्रिय रहने से युवा नेतृत्व को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में संकोच होता है।
  • स्वतंत्रता के समय कांग्रेस अध्यक्ष: 15 अगस्त 1947 के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष आचार्य जे. बी. कृपलानी थे (वे नवंबर 1946 के मेरठ अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए थे)।
  • 15 अगस्त 1947 को गांधी जी का स्थान: आजादी के दिन गांधी जी नई दिल्ली में आयोजित किसी भी समारोह या जश्न में शामिल नहीं थे; वे बंगाल के नोआखली / कलकत्ता (कोलकाता) के बेलियाघाटा में सांप्रदायिक दंगों को शांत कराने और शांति स्थापित करने के लिए उपवास व प्रार्थना में लगे हुए थे।

अतः सही विकल्प (D) वह कांग्रेस के सदस्य ही नहीं थे है।

Share:

Related Questions

→ स्टार्टअप कंपनियों की मदद के लिए सरकार ने हाल ही में कौन सी नई योजना शुरू की है? → किस अनुसूची को 'दल-बदल विरोधी कानून' के रूप में जाना जाता है? → सामान्य विज्ञान, पर्यावरण एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'प्रवाल भित्तियाँ' (Coral Reefs) तथा उनके विरंजन (Coral Bleaching) की परिघटना के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रवाल (Corals) वास्तव में समुद्री जीव होते हैं जो 'Cnidaria' संघ से संबंधित हैं और उनके ऊतकों के भीतर 'जूजैंथिली' (Zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल सहजीवी (Symbiotic) रूप से निवास करते हैं, जो प्रवालों को उनका जीवंत रंग और प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अधिकांश पोषक तत्व प्रदान करते हैं। 2. जब महासागरों के तापमान में वृद्धि, अम्लीकरण या अन्य पर्यावरणीय तनावों के कारण प्रवाल अत्यधिक दबाव में आते हैं, तो वे अपने ऊतकों में रहने वाले जूजैंथिली शैवाल को निष्कासित कर देते हैं, जिससे प्रवाल सफेद रंग के हो जाते हैं और इस प्रक्रिया को 'प्रवाल विरंजन' (Coral Bleaching) कहा जाता है। 3. एक बार विरंजित होने के बाद प्रवाल पूरी तरह से मृत हो जाते हैं और उनके पुनर्जीवित होने या वापस अपने मूल रूप में लौटने की कोई वैज्ञानिक संभावना नहीं बचती है, भले ही पर्यावरणीय तनाव और तापमान की स्थिति सामान्य हो जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत का पहला ऐसा विशेष न्यायिक निकाय है जिसे पर्यावरण से संबंधित किसी भी सिविल मामले में उच्च न्यायालयों की तरह 'मूल क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) का प्रयोग करने की शक्ति प्राप्त है। 2. NGT के अध्यक्ष (Chairperson) और न्यायिक सदस्यों (Judicial Members) की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के साथ परामर्श के पश्चात केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, तथा NGT के Chairperson के रूप में केवल सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ही नियुक्त किया जा सकता है। 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, NGT पर्यावरण से संबंधित मामलों की सुनवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों से बंधा नहीं होता है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है, तथा NGT के आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध केवल उच्चतम न्यायालय में ही सीधे अपील की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → राष्ट्रपति की 'निलंबनकारी वीटो' (Suspensive Veto) शक्ति का प्रयोग किस विधेयक पर नहीं होता?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.