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जीन उत्परिवर्तन (Gene Mutation) और आनुवंशिक कूट (Genetic Code) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation) के अंतर्गत 'मिससेंस उत्परिवर्तन' (Missense mutation) वह स्थिति है जिसमें न्यूक्लियोटाइड के प्रतिस्थापन के कारण कूट एक ऐसे एमीनो अम्ल के लिए कोडित हो जाता है जो भिन्न होता है, जबकि 'नॉनसेंस उत्परिवर्तन' (Nonsense mutation) के परिणामस्वरूप एक समय से पहले 'स्टॉप कोडॉन' (Stop codon) का निर्माण हो जाता है।
- 2. आनुवंशिक कूट 'अपह्रसित' (Degenerate) होता है, जिसका अर्थ है कि एक से अधिक कोडॉन एक ही एमीनो अम्ल के लिए कोडित कर सकते हैं, किंतु यह 'अस्पष्ट' (Ambiguous) भी होता है क्योंकि एक ही कोडॉन एक से अधिक भिन्न एमीनो अम्ल के लिए निर्दिष्ट हो सकता है।
- 3. फ्रेमशिफ्ट उत्परिवर्तन (Frameshift mutation) तब होता है जब डीएनए अनुक्रम में एक या दो न्यूक्लियोटाइडों का विलोपन (Deletion) या प्रवेशन (Insertion) होता है, जिससे विलोपन या प्रवेशन बिंदु के आगे का पूरा पठन फ्रेम (Reading frame) बदल जाता है।
- 4. सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia) हीमोग्लोबिन की बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला के छठे पोजीशन पर ग्लूटामाइन के वैलीन द्वारा प्रतिस्थापन के कारण होता है, जो 'प्वाइंट म्यूटेशन' (बिंदु उत्परिवर्तन) का एक क्लासिक उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बिंदु उत्परिवर्तन में मिससेंस म्यूटेशन से भिन्न एमीनो अम्ल का निर्माण होता है और नॉनसेंस म्यूटेशन से समय से पहले स्टॉप कोडॉन (जैसे UAA, UAG, UGA) बन जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि आनुवंशिक कूट 'अपह्रसित' तो होता है (एक एमीनो अम्ल के लिए कई कोडॉन), लेकिन यह 'अस्पष्ट' (Ambiguous) नहीं होता; एक विशिष्ट कोडॉन हमेशा केवल एक ही एमीनो अम्ल के लिए कोडित करता है, वह अस्पष्ट नहीं होता। कथन 3 सही है: फ्रेमशिफ्ट उत्परिवर्तन में न्यूक्लियोटाइड के जुड़ने या हटने से पूरा रीडिंग फ्रेम बदल जाता है। कथन 4 सही है, सिकल सेल एनीमिया बीटा-ग्लोबिन जीन में एक बिंदु उत्परिवर्तन का परिणाम है जहाँ छठे स्थान पर ग्लूटामाइन की जगह वैलीन आ जाता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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कृत्रिम रेडियोधर्मिता (Artificial radioactivity) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear fission) की परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृत्रिम रेडियोधर्मिता की खोज इрен जूलियो-क्युरी (Irene Joliot-Curie) और फ्रेडरिक जूलियो-क्युरी ने की थी, जिसमें उन्होंने एल्युमिनियम पर अल्फा कणों की बौछार करके एक अस्थायी रेडियोधर्मी समस्थानिक (फास्फोरस-30) का निर्माण किया था जो पॉजिट्रॉन उत्सर्जित करता है।
2. यूरेनियम-235 पर थर्मल न्यूट्रॉन की आघात से होने वाले नाभिकीय विखंडन में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) के कारण अपार ऊर्जा मुक्त होती है, और इस श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए मंदक के रूप में कैडमियम या बोरॉन की छड़ों का उपयोग किया जाता है।
3. ओटो हान और फ्रिट्स स्ट्रॉसबस ने यूरेनियम के न्यूट्रॉन-प्रेरित विखंडन के दौरान बेरियम जैसे हल्के तत्वों की उपस्थिति का पता लगाया था, जिसकी सैद्धांतिक व्याख्या लीट मीटनर और ओटो फ्रिश ने नाभिकीय द्रव बूँद मॉडल (Liquid drop model) के आधार पर की थी।
4. नाभिकीय रिएक्टर में शीतलक (Coolant) के रूप में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ का मुख्य उद्देश्य रिएक्टर के कोर से उत्पन्न ऊष्मा को बाहर निकालना होता है, और इसके लिए भारी जल, पिघला हुआ सोडियम या कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा एक बंद लूप में किया गया कुल कार्य शून्य होता है, और इस बल को स्थितिज ऊर्जा ($Potential Energy$) के ऋणात्मक प्रवणता (Negative gradient) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
2. जब कोई पिण्ड किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर घर्षण बल के विरुद्ध गति करता है, तो निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) संरक्षित रहती है, क्योंकि घर्षण बल केवल ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में रूपांतरित करता है।
3. अप्रत्याशित टक्कर (Inelastic collision) के दौरान संवेग का संरक्षण तो होता है, किंतु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है, और ऊर्जा का एक हिस्सा ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण के रूप में क्षय हो जाता है।
4. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम इस बात पर आधारित है कि जब तक किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण (External torque) कार्य नहीं करता है, तब तक निकाय का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है, जैसे कि सूर्य के चारों ओर घूमते हुए ग्रह की क्षेत्रीय चाल का संरक्षित रहना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जीन विनिमय (Crossing over) और आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Genetic recombination) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सह-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था में होती है।
2. आनुवंशिक मानचित्र (Genetic map) तैयार करते समय, दो सहलग्न जीनों के बीच पुनर्संयोजन आवृत्ति (Recombination frequency) उनके बीच की भौतिक दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. सेक्स-लिंक्ड (Sex-linked) लक्षणों की वंशागति में, 'क्रिस-क्रॉस वंशागति' (Criss-cross inheritance) वह पैटर्न है जिसमें एक लक्षण पिता से उसकी पुत्री में और माता से उसके पुत्र में संचरित होता है।
4. बहुप्रभाविता (Pleiotropy) वह स्थिति है जिसमें एक अकेला जीन एक से अधिक भिन्न-भिन्न फेनोटाइपिक लक्षणों को नियंत्रित या प्रभावित करता है, जैसे कि मनुष्यों में सिकल सेल एनीमिया।
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केपलर के ग्रहों की गति के नियमों और उपग्रहों की कक्षीय गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केपलर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत गति करते समय किसी ग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिससे ग्रह सूर्य के समीप (उपसौर) होने पर न्यूनतम चाल और दूर होने पर अधिकतम चाल से गति करता है।
2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे किसी उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो इस भौतिक सत्य को दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है और उसे पलायन करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता है।
3. भू-तुल्यकालिक उपग्रह (Geosynchronous Satellite) की पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित होने पर परिक्रमण काल ठीक 24 घंटे होता है, बशर्ते उसकी गति की दिशा पृथ्वी के घूर्णन की दिशा के विपरीत (पूर्व से पश्चिम) हो।
4. किसी कृत्रिम उपग्रह के भीतर स्थित अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं, जिससे उनके बीच कोई अभिलंब प्रतिक्रिया बल कार्य नहीं करता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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