BaalVikas
Menu
General Science
Asked 12 hours ago · Viewed 1 times

जीन नियमन (Gene regulation) और ओपेरान मॉडल (Operon model) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जैकब और मोनोड (Jacob and Monod) द्वारा प्रतिपादित 'लैस ओपेरान' (Lac operon) एक ऋणात्मक रूप से विनियमित प्रतिपीडीय (Inducible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें लैक्टोज की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रोटीन (Repressor protein) ऑपरेटर जीन से जुड़कर संरचनात्मक जीनों के अनुलेखन को रोकता है।
  2. 2. लैस ओपेरान में 'अल्लैक्टोज' (Allolactose) एक प्रेरक (Inducer) के रूप में कार्य करता है जो दमनकारी प्रोटीन से बंधकर उसके आकार को बदल देता है, जिससे वह ऑपरेटर जीन से अलग हो जाता है और अनुलेखन प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
  3. 3. 'ट्रिप ओपेरान' (Trp operon) एक दमनकारी (Repressible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें ट्रिप्टोफैन की उच्च सांद्रता सह-दमनकारी (Co-repressor) के रूप में कार्य करती है और दमनकारी प्रोटीन को सक्रिय करके ऑपरेटर से जोड़ती है, जिससे अनुलेखन रुक जाता है।
  4. 4. यूकेरियोटिक कोशिकाओं में जीन अभिव्यक्ति का नियमन केवल अनुलेखन स्तर (Transcription level) पर ही होता है, और इसमें क्रोमैटिन पुनर्रूपण (Chromatin remodeling) या हिस्टोन एसिटिलीकरण की कोई भूमिका नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। जैकब और मोनोड ने प्रोकैरियोट्स (जैसे E. coli) में जीन अभिव्यक्ति के नियंत्रण के लिए ओपेरान मॉडल प्रस्तुत किया था। लैस ओपेरान एक इंडिसीबल ओपेरान है जो लैक्टोज की उपस्थिति में सक्रिय होता है, जहाँ अल्लैक्टोज एक प्रेरक के रूप में कार्य करता है। ट्रिप ओपेरान एक रिप्रेसिबल ओपेरान है जिसमें ट्रिप्टोफैन सह-दमनकारी की तरह कार्य करता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि यूकेरियोट्स में जीन नियमन केवल अनुलेखन स्तर पर ही नहीं, बल्कि क्रोमैटिन पुनर्रूपण, आरएनए संसाधन और अनुवाद स्तर पर भी होता है। विकिपीडिया संदर्भ
Share:
अगला प्रश्न → कृत्रिम रेडियोधर्मिता (Artificial radioactivity) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear… ← पिछला प्रश्न जीन उत्परिवर्तन (Gene Mutation) और आनुवंशिक कूट (Genetic…

Related Questions

→ यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा एक बंद लूप में किया गया कुल कार्य शून्य होता है, और इस बल को स्थितिज ऊर्जा ($Potential Energy$) के ऋणात्मक प्रवणता (Negative gradient) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। 2. जब कोई पिण्ड किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर घर्षण बल के विरुद्ध गति करता है, तो निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) संरक्षित रहती है, क्योंकि घर्षण बल केवल ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में रूपांतरित करता है। 3. अप्रत्याशित टक्कर (Inelastic collision) के दौरान संवेग का संरक्षण तो होता है, किंतु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है, और ऊर्जा का एक हिस्सा ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण के रूप में क्षय हो जाता है। 4. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम इस बात पर आधारित है कि जब तक किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण (External torque) कार्य नहीं करता है, तब तक निकाय का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है, जैसे कि सूर्य के चारों ओर घूमते हुए ग्रह की क्षेत्रीय चाल का संरक्षित रहना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सोडियम धातु को अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण किरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है, ताकि वह वायु के संपर्क में आने पर ऑक्सीजन और नमी से तीव्र प्रतिक्रिया कर स्वतः प्रज्वलित न हो सके। 2. नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) एक प्रबल ऑक्सीकारक है, जो अधिकांश धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है, क्योंकि यह धातु की सतह पर उत्पन्न हाइड्रोजन को आसानी से जल में ऑक्सीकृत कर देता है। 3. 'थर्माइट वेल्डिंग' (Thermite welding) प्रक्रिया में एल्युमिनियम चूर्ण और फेरिक ऑक्साइड ($Fe_3O_4$ या $Fe_2O_3$) के मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जहाँ एल्युमिनियम अपनी उच्च विद्युत-धनात्मक प्रकृति के कारण लोहे के ऑक्साइड से आयरन को अपचयन द्वारा विस्थापित करता है और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। 4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) के अलावा, सोना और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुएँ सामान्य अम्लों जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या नाइट्रिक अम्ल में नहीं घुलती हैं, किंतु वे 'अम्लराज' (Aqua regia - सांद्र $HCl$ और सांद्र $HNO_3$ का $3:1$ मिश्रण) में घुलकर क्लोराइड संकुल बनाती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative properties) और रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम से प्राप्त होता है जो विलेय की प्रकृति पर निर्भर करता है। 2. समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक एक ही भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है और अभिकारक गैस या द्रव अवस्था में होते हैं, जहाँ 'अधिघोषणा' या अधिशोषक की सतह पर अणुओं का अधिशोषणी सक्रियण मुख्य भूमिका निभाता है। 3. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और उच्च दक्षता वाले होते हैं, और इनकी कार्यप्रणाली 'ताला-कुंजी मॉडल' (Lock and Key model) या 'प्रेरित फिट मॉडल' (Induced fit model) द्वारा समझाई जाती है, जो तापमान और pH के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। 4. वांट-हॉफ गुणांक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए 1 से कम होता है जो जलीय विलयन में पूरी तरह से वियोजित (Dissociate) हो जाते हैं, जैसे कि सोडियम क्लोराइड या पोटेशियम सल्फेट। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → जीन विनिमय (Crossing over) और आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Genetic recombination) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सह-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था में होती है। 2. आनुवंशिक मानचित्र (Genetic map) तैयार करते समय, दो सहलग्न जीनों के बीच पुनर्संयोजन आवृत्ति (Recombination frequency) उनके बीच की भौतिक दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है। 3. सेक्स-लिंक्ड (Sex-linked) लक्षणों की वंशागति में, 'क्रिस-क्रॉस वंशागति' (Criss-cross inheritance) वह पैटर्न है जिसमें एक लक्षण पिता से उसकी पुत्री में और माता से उसके पुत्र में संचरित होता है। 4. बहुप्रभाविता (Pleiotropy) वह स्थिति है जिसमें एक अकेला जीन एक से अधिक भिन्न-भिन्न फेनोटाइपिक लक्षणों को नियंत्रित या प्रभावित करता है, जैसे कि मनुष्यों में सिकल सेल एनीमिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.