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कृत्रिम रेडियोधर्मिता (Artificial radioactivity) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear fission) की परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कृत्रिम रेडियोधर्मिता की खोज इрен जूलियो-क्युरी (Irene Joliot-Curie) और फ्रेडरिक जूलियो-क्युरी ने की थी, जिसमें उन्होंने एल्युमिनियम पर अल्फा कणों की बौछार करके एक अस्थायी रेडियोधर्मी समस्थानिक (फास्फोरस-30) का निर्माण किया था जो पॉजिट्रॉन उत्सर्जित करता है।
  2. 2. यूरेनियम-235 पर थर्मल न्यूट्रॉन की आघात से होने वाले नाभिकीय विखंडन में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) के कारण अपार ऊर्जा मुक्त होती है, और इस श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए मंदक के रूप में कैडमियम या बोरॉन की छड़ों का उपयोग किया जाता है।
  3. 3. ओटो हान और फ्रिट्स स्ट्रॉसबस ने यूरेनियम के न्यूट्रॉन-प्रेरित विखंडन के दौरान बेरियम जैसे हल्के तत्वों की उपस्थिति का पता लगाया था, जिसकी सैद्धांतिक व्याख्या लीट मीटनर और ओटो फ्रिश ने नाभिकीय द्रव बूँद मॉडल (Liquid drop model) के आधार पर की थी।
  4. 4. नाभिकीय रिएक्टर में शीतलक (Coolant) के रूप में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ का मुख्य उद्देश्य रिएक्टर के कोर से उत्पन्न ऊष्मा को बाहर निकालना होता है, और इसके लिए भारी जल, पिघला हुआ सोडियम या कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उपयोग किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: इрен जूलियो-क्युरी और फ्रेडरिक जूलियो-क्युरी ने 1934 में कृत्रिम रेडियोधर्मिता की खोज की थी। कथन 2 गलत है क्योंकि नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए नियंत्रण छड़ों (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जबकि मंदक (Moderator) के रूप में भारी जल या ग्रेफाइट का उपयोग न्यूट्रॉन की गति को धीमा करने के लिए किया जाता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ओटो हान और स्ट्रॉसबस ने विखंडन प्रक्रिया की खोज की थी, जिसकी व्याख्या मीटनर और फ्रिश ने द्रव बूँद मॉडल से की थी, अतः कथन 3 सही है। कथन 4 भी सही है क्योंकि रिएक्टर की ऊष्मा को स्थानांतरित करने के लिए शीतलक के रूप में भारी जल, द्रवित सोडियम या गैसों का उपयोग होता है।
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