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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी धात्विक चालक का विद्युत प्रतिरोध तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है, क्योंकि उच्च ताप पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों और आयनों के बीच संघट्ट (collisions) की आवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे उनका श्रांति काल (relaxation time) घट जाता है।
- 2. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वे बाह्य चुंबकीय क्षेत्र का पूर्ण विरोध करते हुए आदर्श प्रतिचुंबकीय व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, जिसे 'माइस्नर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
- 3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
- 4. मिश्रधातुओं (जैसे मैंगनीन या कांस्टेंटन) का उपयोग मानक प्रतिरोधक बनाने के लिए किया जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधकता बहुत कम होती है और उनका प्रतिरोध ताप गुणांक (temperature coefficient of resistance) अत्यधिक उच्च होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि तापमान बढ़ाने पर चालकों के भीतर इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग और संघट्ट बढ़ जाता है जिससे श्रांति काल कम होता है और प्रतिरोध बढ़ता है। कथन 2 सही है; अतिचालकता की अवस्था में प्रतिरोध शून्य होता है और माइस्नर प्रभाव के तहत चुंबकीय फ्लक्स बाहर धकेल दिया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि किर्चॉफ का वोल्टेज नियम ऊर्जा संरक्षण (Law of Conservation of Energy) पर आधारित है। कथन 4 गलत है क्योंकि मानक प्रतिरोधक बनाने के लिए प्रयुक्त मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उच्च होती है और उनका प्रतिरोध ताप गुणांक **नगण्य (बहुत कम)** होता है, उच्च नहीं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions
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मानव पोषण और जैव अणुओं (विटामिन और कार्बोहाइड्रेट) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रोविटामिन के रूप में त्वचा में कोलेस्ट्रॉल के व्युत्पन्न (7-डाइहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल) से पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में संश्लेषित होता है, और यह आंत में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है।
2. ग्लाइकोजन एक शाखित पॉलीसैक्राइड है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ मुख्य रूप से $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा और शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और यह जंतुओं एवं कवक में मुख्य रूप से यकृत तथा कंकाल पेशियों में संचित होता है।
3. विटामिन B1 (थiamine) के सक्रिय सह-एंजाइम रूप (थiamine pyrophosphate) की कमी के कारण 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जो तंत्रिका तंत्र और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है, और पॉलिश किए हुए चावल के अत्यधिक सेवन से इसकी कमी की संभावना बढ़ जाती है।
4. सेलूलोज़ पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, जो ग्लूकोज की $\alpha$-D-इकाइयों से बनी एक सीधी रैखिक पॉलीसैक्राइड श्रृंखला है, जिसे मानव पाचन तंत्र में मौजूद पाचक एंजाइमों (जैसे एमाइलेज) द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास के संदर्भ में, हार्डी-वेनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg equilibrium) और उसके विचलनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत के अनुसार, एक बड़ी यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाली आबादी में एलील (Allele) और जीनप्ररूप (Genotype) आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर और नियत रहती हैं, बशर्ते उस पर कोई विकासात्मक बल जैसे उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन या आनुवंशिक विचलन कार्य न कर रहा हो।
2. आनुवंशिक बहाव (Genetic drift) एक यादृच्छिक प्रक्रिया है जो मुख्य रूप से बड़ी आबादी की तुलना में छोटी आबादी में अधिक प्रभावी होती है, और यह 'संस्थापक प्रभाव' (Founder effect) या 'बॉटलनेक प्रभाव' (Bottleneck effect) के माध्यम से एलील आवृत्तियों में तेजी से परिवर्तन ला सकती है।
3. प्राकृतिक चयन (Natural selection) के 'दिशात्मक चयन' (Directional selection) प्रारूप में, चरम फेनोटाइप वाले जीवों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे जनसंख्या का माध्य मान किसी एक विशिष्ट दिशा में विस्थापित हो जाता है, जैसे कि औद्योगिक वर्णान्धता (Industrial melanism) का उदाहरण।
4. जीन प्रवाह (Gene flow) या प्रवासन (Migration) विभिन्नpopulations के बीच एलीलों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, जिससे समय के साथ विभिन्न समष्टियों के बीच आनुवंशिक भिन्नता (Genetic divergence) बढ़ती है और उनके बीच प्रजाति-निर्माण (Speciation) की दर धीमी हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के गुणों, आवर्तिता (Periodicity) और उनके परमाणु विन्यासों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, जिसका मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि होना है, जिससे बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बढ़ जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान फ्लोरिन की तुलना में क्लोरीन का अधिक ऋणात्मक होता है, क्योंकि फ्लोरिन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण इसके 2p उपकोष में आने वाले नए इलेक्ट्रॉन के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण (Inter-electronic repulsion) अधिक होता है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'मोजले' का नियम परमाणु द्रव्यमान पर आधारित है, जिसके अनुसार तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन होते हैं।
4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की आयनन ऊर्जा (Ionization Energy) अपने संबंधित आवर्त में सबसे अधिक होती है, क्योंकि उनके बाह्यतम कोश पूरी तरह से भरे होते हैं और उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अत्यधिक स्थायी होता है।
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मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (Nutrition and Vitamins) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो यकृत (Liver) और मांसपेशियों में दीर्घकालिक रूप से संग्रहीत किया जा सकता है, और इसके अवशोषण के लिए गैस्ट्रिक म्यूकोसा द्वारा स्रावित 'इन्ट्रीसिक फैक्टर' (Intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
2. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत यकृत में संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-6-फास्फेट में जलअपघटन होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है।
3. आवश्यक वसीय अम्ल (Essential fatty acids) जैसे लिनोलिक अम्ल और लिनोलेनिक अम्ल मानव शरीर में संश्लेषित किए जा सकते हैं, क्योंकि मानव शरीर में डेल्टा-12 और डेल्टा-15 डीसैचुरेज एंजाइम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
4. प्रोटीन की प्राथमिक संरचना (Primary structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्लों के रैखिक अनुक्रम को दर्शाती है, जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती है, और यह संरचना प्रोटीन की जैविक विशिष्टता को निर्धारित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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