General Science
Asked 9 hours ago · Viewed 0 times
कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) होते हैं, और इनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, जबकि एल्काइन्स (Alkynes) में कम से कम एक कार्बन-कार्बन त्रि-बंध (Triple bond) उपस्थित होता है और उनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n-2}$ होता है।
- 2. ऑक्टेन संख्या (Octane number) का उपयोग डीजल इंजनों में प्रयुक्त ईंधन की गुणवत्ता को मापने के लिए किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन कम 'नॉक' (Knocking) उत्पन्न करता है।
- 3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें जो गंधयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है, वह एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) होता है।
- 4. फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया (Fischer-Tropsch process) एक ऐसी रासायनिक विधि है जिसके द्वारा कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के मिश्रण (वाटर गैस) से कृत्रिम तरल हाइड्रोकार्बन (संश्लेषित ईंधन) का निर्माण किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि एल्केन्स संतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं जिनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, और एल्काइन्स में त्रि-बंध होता है जिनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n-2}$ होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि ऑक्टेन संख्या का उपयोग 'पेट्रोल (गेसोलीन)' की गुणवत्ता मापने के लिए किया जाता है, जबकि डीजल की गुणवत्ता 'सीटेन संख्या' (Cetane number) से मापी जाती है। कथन 3 सही है; LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है और इसमें रिसाव का पता लगाने के लिए एथिल मर्कैप्टेन मिलाया जाता है। कथन 4 सही है क्योंकि फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया सिंथेटिक ईंधन उत्पादन की एक प्रसिद्ध विधि है। विकिपीडिया संदर्भ
अगला प्रश्न →
विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार…
← पिछला प्रश्न
आवर्त सारणी के तत्वों के गुणों, आवर्तिता (Periodicity) और…
Related Questions
→
मानव शरीर के तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय के संकुचन के दौरान उत्पन्न होने वाले विद्युत आवेगों (Action potentials) की शुरुआत स्वाभाविक रूप से सिनोट्रायल नोड (SA Node) द्वारा होती है, जिसे हृदय का 'पेसमेकर' कहा जाता है, और इसका संचरण एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (AV Node) के माध्यम से बंडल ऑफ हिस और पुर्किंजे तंतुओं तक होता है।
2. तंत्रिका तंत्र में सिनेप्स (Synapse) के पार रासायनिक संकेतों के संचरण के दौरान, जब तंत्रिकाक्ष (Axon) का अंतिम छोर पर पहुंचता है, तो कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) का प्रवेश न्यूरोट्रांसमीटर से भरे पुटिकाओं (Vesicles) को एक्सोसाइटोसिस (Exocytosis) द्वारा सिनेप्सिस अंतराल में मुक्त करने के लिए प्रेरित करता है।
3. गैस्ट्रिक पाचन के दौरान, आमाशय की पैराइटल कोशिकाओं (Parietal cells) द्वारा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'इन्ट्रीसिक फैक्टर' (Intrinsic factor) का स्राव किया जाता है, जो छोटी आंत के इलियम (Ileum) क्षेत्र में विटामिन $B_{12}$ के सक्रिय अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
4. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के अंतर्गत अंतःश्वसन (Inhalation) एक सक्रिय प्रक्रिया है जिसमें डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों (External intercostal muscles) के संकुचन के कारण वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है और फुफ्फुसीय दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव पोषण और जैव अणुओं (विटामिन और कार्बोहाइड्रेट) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रोविटामिन के रूप में त्वचा में कोलेस्ट्रॉल के व्युत्पन्न (7-डाइहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल) से पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में संश्लेषित होता है, और यह आंत में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है।
2. ग्लाइकोजन एक शाखित पॉलीसैक्राइड है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ मुख्य रूप से $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा और शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और यह जंतुओं एवं कवक में मुख्य रूप से यकृत तथा कंकाल पेशियों में संचित होता है।
3. विटामिन B1 (थiamine) के सक्रिय सह-एंजाइम रूप (थiamine pyrophosphate) की कमी के कारण 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जो तंत्रिका तंत्र और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है, और पॉलिश किए हुए चावल के अत्यधिक सेवन से इसकी कमी की संभावना बढ़ जाती है।
4. सेलूलोज़ पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, जो ग्लूकोज की $\alpha$-D-इकाइयों से बनी एक सीधी रैखिक पॉलीसैक्राइड श्रृंखला है, जिसे मानव पाचन तंत्र में मौजूद पाचक एंजाइमों (जैसे एमाइलेज) द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (Nutrition and Vitamins) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो यकृत (Liver) और मांसपेशियों में दीर्घकालिक रूप से संग्रहीत किया जा सकता है, और इसके अवशोषण के लिए गैस्ट्रिक म्यूकोसा द्वारा स्रावित 'इन्ट्रीसिक फैक्टर' (Intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
2. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत यकृत में संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-6-फास्फेट में जलअपघटन होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है।
3. आवश्यक वसीय अम्ल (Essential fatty acids) जैसे लिनोलिक अम्ल और लिनोलेनिक अम्ल मानव शरीर में संश्लेषित किए जा सकते हैं, क्योंकि मानव शरीर में डेल्टा-12 और डेल्टा-15 डीसैचुरेज एंजाइम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
4. प्रोटीन की प्राथमिक संरचना (Primary structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्लों के रैखिक अनुक्रम को दर्शाती है, जो पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती है, और यह संरचना प्रोटीन की जैविक विशिष्टता को निर्धारित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोडियम धातु को अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण किरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है, ताकि वह वायु के संपर्क में आने पर ऑक्सीजन और नमी से तीव्र प्रतिक्रिया कर स्वतः प्रज्वलित न हो सके।
2. नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) एक प्रबल ऑक्सीकारक है, जो अधिकांश धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है, क्योंकि यह धातु की सतह पर उत्पन्न हाइड्रोजन को आसानी से जल में ऑक्सीकृत कर देता है।
3. 'थर्माइट वेल्डिंग' (Thermite welding) प्रक्रिया में एल्युमिनियम चूर्ण और फेरिक ऑक्साइड ($Fe_3O_4$ या $Fe_2O_3$) के मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जहाँ एल्युमिनियम अपनी उच्च विद्युत-धनात्मक प्रकृति के कारण लोहे के ऑक्साइड से आयरन को अपचयन द्वारा विस्थापित करता है और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) के अलावा, सोना और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुएँ सामान्य अम्लों जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या नाइट्रिक अम्ल में नहीं घुलती हैं, किंतु वे 'अम्लराज' (Aqua regia - सांद्र $HCl$ और सांद्र $HNO_3$ का $3:1$ मिश्रण) में घुलकर क्लोराइड संकुल बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.