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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार अवधारणाओं (Acid-Base Concepts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं।
- 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, जल एक उभयधर्मी (Amphoteric) विलायक के रूप में कार्य करता है जो अम्ल और क्षार दोनों प्रकार की भूमिका निभा सकता है।
- 3. जब किसी दुर्बल अम्ल (Weak Acid) के सोडियम लवण को उसी दुर्बल अम्ल के साथ मिलाया जाता है, तो यह मिश्रण एक बफर विलयन (Buffer Solution) बनाता है, जिसका pH मान केवल अम्ल की सांद्रता पर निर्भर करता है और लवण की सांद्रता से अप्रभावित रहता है।
- 4. संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में एक प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक दुर्बल क्षार होता है, और इसके विपरीत नियम भी सत्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि लुईस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाले को लुईस अम्ल तथा दान करने वाले को लुईस क्षार कहा जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि ब्रॉन्स्टेड-लोरी अवधारणा के अनुसार जल प्रोटॉन ग्रहण भी कर सकता है और त्याग भी सकता है, जिससे यह उभयधर्मी प्रकृति प्रदर्शित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि बफर विलयन (जैसे दुर्बल अम्ल और उसके लवण का मिश्रण) का pH मान हेंडरसन-हासेलबल समीकरण के अनुसार अम्ल और लवण दोनों के सांद्रता अनुपातों पर निर्भर करता है, न कि केवल अम्ल पर। कथन 4 सही है, एक प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यंत दुर्बल होता है। विकिपीडिया संदर्भ
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के चक्रों और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद् (Gametophyte) होता है जो बीजाणुद्भिद् पर आश्रित नहीं रहता बल्कि बीजाणुद्भिद् इस पर परजीवी के रूप में निर्भर रहता है।
2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य या शून्य होती है, क्योंकि इनमें कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक स्थिकीकरण मैसोज़िफ़ेल कोशिकाओं में 'પેP' (PEP carboxylase) एंजाइम द्वारा होता है, जो ऑक्सीजन के प्रति उच्च आकर्षण नहीं रखता।
3. जिबरलिन (Gibberellin) हार्मोन आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में तने की लंबाई को तेजी से बढ़ाने (बोल्टिंग) का कार्य करता है और यह अंगूर के डंठलों को लंबा करने तथा सेब जैसे फलों के आकार को सुधारने में भी सहायता करता है।
4. एब्सिसिक एसिड (ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है, जो जल की कमी के समय रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है, जबकि साइटोकाइनिन (Cytokinin) पत्तियों में जीर्णता (Senescence) को त्वरित करने का मुख्य कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन और ईंधन की विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ है, और इनमें कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित होते हैं, जबकि एल्कीन्स (Alkenes) में द्वि-बंध वाले कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होते हैं।
2. पेट्रोल की गुणवत्ता को मापने के लिए 'ऑक्टेन संख्या' (Octane number) का उपयोग किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन इंजन में कम 'नॉक' (Knocking) उत्पन्न करता है और इसके मानक के रूप में आइसोपेंटेन का उपयोग किया जाता है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और इसमें गैस रिसाव का पता लगाने के लिए एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) नामक गंधयुक्त यौगिक मिलाया जाता है।
4. फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया (Fischer-Tropsch process) द्वारा जल गैस (Water gas - $CO + H_2$) के उत्प्रेरकी hydrogenation से कृत्रिम तरल हाइड्रोकार्बन (सिंथेटिक ईंधन) का निर्माण किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों के निर्माण, उनके अपवर्तनांक तथा गोलीय सतहों के अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) $\frac{1}{f} = (n - 1) \left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$ के अनुसार, किसी लेंस की फोकस दूरी केवल उसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्या पर निर्भर करती है और उस माध्यम के अपवर्तनांक से पूर्णतः स्वतंत्र होती है जिसमें लेंस को डुबोया गया है।
2. जब किसी पतले उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी का चिन्ह बदल जाता है और वह लेंस अभिसारी (Converging) से अपसारी (Diverging) प्रकृति में परिवर्तित हो जाता है।
3. यदि किसी संयुक्त लेंस निकाय में दो पतले लेंस जिनकी फोकस दूरियाँ $f_1$ और $f_2$ हैं, एक-दूसरे के संपर्क में रखे गए हैं, तो इस संयोजन की कुल प्रभावी शक्ति (Effective Power) व्यक्तिगत लेंसों की शक्तियों के बीजगणितीय योग $P = P_1 + P_2$ के बराबर होती है।
4. एक वर्णात्मक (Achromatic) लेंस संयोजन का निर्माण करते समय यह आवश्यक होता है कि दोनों लेंसों के वर्ण विक्षेपण क्षमता (Dispersive powers) समान हों, किंतु उनके पदार्थों के लेंसों की प्रकृति (एक उत्तल और एक अवतल) विपरीत होनी चाहिए ताकि न्यूनतम विचलन प्राप्त किया जा सके।
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आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) के मान में सामान्यतः वृद्धि होती है, किंतु बोरॉन (B) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान बेरिलियम (Be) की तुलना में कम होता है, जिसका मुख्य कारण बेरिलियम के पूर्णतः भरे हुए 2s कक्षक का अधिक स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होना है।
2. नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान अपने से अगले तत्व ऑक्सीजन (O) की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि नाइट्रोजन के 2p उपकोष में अर्ध-पूरित (Half-filled) कक्षकों का होना अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है।
3. आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान लगातार बढ़ता जाता है, और यही कारण है कि क्लोरीन की तुलना में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान अत्यधिक ऋणात्मक होता है।
4. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्वों) में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ आकार में होने वाला संकुचन 'लैंथेनाइड संकुचन' कहलाता है, जो मुख्य रूप से f-इलेक्ट्रॉनों के अत्यंत दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) के कारण उत्पन्न होता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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