BaalVikas
Menu
General Science
Asked 5 hours ago · Viewed 0 times

पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के चक्रों और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद् (Gametophyte) होता है जो बीजाणुद्भिद् पर आश्रित नहीं रहता बल्कि बीजाणुद्भिद् इस पर परजीवी के रूप में निर्भर रहता है।
  2. 2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य या शून्य होती है, क्योंकि इनमें कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक स्थिकीकरण मैसोज़िफ़ेल कोशिकाओं में 'પેP' (PEP carboxylase) एंजाइम द्वारा होता है, जो ऑक्सीजन के प्रति उच्च आकर्षण नहीं रखता।
  3. 3. जिबरलिन (Gibberellin) हार्मोन आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में तने की लंबाई को तेजी से बढ़ाने (बोल्टिंग) का कार्य करता है और यह अंगूर के डंठलों को लंबा करने तथा सेब जैसे फलों के आकार को सुधारने में भी सहायता करता है।
  4. 4. एब्सिसिक एसिड (ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है, जो जल की कमी के समय रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है, जबकि साइटोकाइनिन (Cytokinin) पत्तियों में जीर्णता (Senescence) को त्वरित करने का मुख्य कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है और इनमें बीजाणुद्भिद् आंशिक या पूर्ण रूप से युग्मकोद्भिद् पर आश्रित होता है। C4 पौधों में प्रकाश श्वसन नगण्य होता है क्योंकि PEP कार्बोक्सिलेस एंजाइम की ऑक्सीजन के प्रति कोई आत्मीयता नहीं होती है। जिबरलिन बोल्टिंग और फलों के विकास में सहायक है। इसके विपरीत, एब्सिसिक एसिड तनाव हार्मोन है और रंध्र बंद करता है, किंतु साइटोकाइनिन जीर्णता (बुढ़ापे) को *त्वरित* नहीं बल्कि *विलंबित* (Delay) करता है। प्रकाश संश्लेषण और पादप दैहिकी के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → कार्बनिक रसायन और ईंधन की विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में… ← पिछला प्रश्न मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों…

Related Questions

→ यांत्रिकी के अंतर्गत कार्य, ऊर्जा, और संवेग संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किया गया कार्य मार्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और एक बंद पथ में संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है। 2. जब कोई वस्तु किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर घर्षण बल के विरुद्ध गति करती है, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) संरक्षित रहती है क्योंकि घर्षण एक आंतरिक बल के रूप में कार्य करता है। 3. पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर (Perfectly elastic collision) के मामले में, संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, तथा इस प्रकार की टक्कर के लिए प्रत्यावस्थान गुणांक (Coefficient of restitution, e) का मान ठीक एक ($e = 1$) होता है। 4. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम तब लागू होता है जब निकाय पर लगने वाला कुल बाह्य बल आघूर्ण (External torque) का मान शून्य होता है, जिसके कारण ग्रहीय गति में सूर्य के निकट आने पर ग्रह की कोणीय चाल बढ़ जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के विभिन्न चक्रों और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) प्रथम ऐसे स्थलीय पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर बीजाणुद्भिद् (Sporophyte) होता है, जो स्वतंत्र रूप से जीवित रहता है और इसका युग्मकोद्भिद् (Prothallus) अल्पજીवी किंतु स्वतंत्र होता है। 2. C3 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर काफी अधिक होती है क्योंकि 'रुबिस्को' (RuBisCO) एंजाइम की कार्बन डाइऑक्साइड के साथ-साथ ऑक्सीजन के प्रति भी उच्च आबंधुता (Affinity) होती है, जिससे यह राइबुलोस 1,5-बिफॉस्फेट का कार्बोक्सिलेशन करने के बजाय ऑक्सीजनेशन कर देता है। 3. एथिलीन (Ethylene) एकमात्र ऐसा गैसीय पादप हार्मोन है जो फलों के पकने को प्रेरित करता है, फूलों में नर पुष्पों की तुलना में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाता है, और यह द्विबीजपत्री पौधों में प्रसुप्तता (Dormancy) को तोड़ने तथा एपिकल डोमिनेंस को बढ़ावा देने का मुख्य कार्य करता है। 4. प्रकाश संश्लेषण के प्रदीप्त अभिक्रिया (Light Reaction) के दौरान चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलीकरण (Cyclic Photophosphorylation) में केवल फोटोसिस्टम I (PS I) भाग लेता है, जिसमें जल के प्रकाश अपघटन (Photolysis) की आवश्यकता नहीं होती और इसमें NADPH के साथ-साथ ATP का भी निर्माण होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार अवधारणाओं (Acid-Base Concepts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं। 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, जल एक उभयधर्मी (Amphoteric) विलायक के रूप में कार्य करता है जो अम्ल और क्षार दोनों प्रकार की भूमिका निभा सकता है। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल (Weak Acid) के सोडियम लवण को उसी दुर्बल अम्ल के साथ मिलाया जाता है, तो यह मिश्रण एक बफर विलयन (Buffer Solution) बनाता है, जिसका pH मान केवल अम्ल की सांद्रता पर निर्भर करता है और लवण की सांद्रता से अप्रभावित रहता है। 4. संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में एक प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक दुर्बल क्षार होता है, और इसके विपरीत नियम भी सत्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी अर्धचालक (Semiconductor) का विद्युत प्रतिरोध ताप में वृद्धि के साथ घटता है, क्योंकि तापमान बढ़ने पर सहसंयोजक बंध टूटते हैं और आवेश वाहकों (मुक्त इलेक्ट्रॉनों और होलों) की संख्या में तेजी से वृद्धि होती है, जिससे इसका प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है। 2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 3. जब समान विभव के कई सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो इस संयोजन से प्राप्त कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में काफी कम हो जाता है, जिससे यह उच्च प्रतिरोध वाले बाह्य परिपथों के लिए अत्यंत उपयोगी होता है। 4. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग किसी अज्ञात प्रतिरोध के सटीक माप के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में तब होता है जब गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित धारा का मान शून्य होता है, जिससे समीकरण $\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$ प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.