BaalVikas
Menu
General Science
Asked 3 hours ago · Viewed 0 times

मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके संचरण के माध्यमों तथा उनके उपचार या बचाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'टिटनेस' (Tetanus) रोग का कारण 'क्लॉस्ट्रेडियम टिटानी' (Clostridium tetani) नामक जीवाणु द्वारा स्रावित एक अत्यंत शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन (टेटैनोस्पैस्मिन) है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और इसके उपचार या रोकथाम के लिए 'डीपीटी' (DPT) टीका लगाया जाता है।
  2. 2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणुजनित घातक बीमारी है जो मुख्य रूप से लाइساवाइरस (Lyssavirus) के संक्रमण से होती है, और इसके विषाणु लार के माध्यम से तंत्रिका तंतुओं के सहारे मस्तिष्क तक पहुँचते हैं, जिसके लिए लुई पाश्चर द्वारा विकसित 'निष्क्रियकृत एंटी-रेबीज टीका' का उपयोग किया जाता है।
  3. 3. 'मलेरिया' रोग प्लाज्मोडियम फाल्ciparum द्वारा होता है, जिसके जीवन चक्र का लैंगिक चरण मादा एनोफेलीज मच्छर की आंत में पूरा होता है, जबकि इसका प्राथमिक संक्रामक रूप 'स्पोरोज़ोइट' (Sporozoite) मानव यकृत कोशिकाओं में संक्रमण फैलाता है।
  4. 4. 'एड्स' (AIDS) एक रिट्रोवाइरस (HIV) जनित संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से शरीर की विशिष्ट प्रतिरक्षा कोशिकाओं यानी 'सीडी4' (CD4+) हेल्पर टी-लिम्फोसाइट्स को नष्ट करता है, और इसके निदान के लिए 'वेस्टर्न ब्लॉट' तथा प्रारंभिक संसूचन के लिए 'एलिसा' (ELISA) परीक्षण किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। टिटनेस एक जीवाणु जनित घातक रोग है जिसमें पेशियों में तीव्र ऐंठन होती है और इसका टीका डी.पी.टी. के रूप में दिया जाता है। रेबीज लाइसावाइरस के कारण होता है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है जिसका संचरण मादा एनोफेलीज मच्छर द्वारा स्पोरोज़ोइट अवस्था में होता है। एड्स एचआईवी (HIV) के संक्रमण से होता है जो सीडी4 टी-कोशिकाओं पर हमला कर प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करता है, और इसके परीक्षण के लिए एलिसा तथा वेस्टर्न ब्लॉट का उपयोग किया जाता है। विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के चक्रों और पादप हार्मोन्स की… ← पिछला प्रश्न रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार अवधारणाओं (Acid-Base Concepts)…

Related Questions

→ कार्बनिक रसायन और ईंधन की विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ है, और इनमें कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित होते हैं, जबकि एल्कीन्स (Alkenes) में द्वि-बंध वाले कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होते हैं। 2. पेट्रोल की गुणवत्ता को मापने के लिए 'ऑक्टेन संख्या' (Octane number) का उपयोग किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन इंजन में कम 'नॉक' (Knocking) उत्पन्न करता है और इसके मानक के रूप में आइसोपेंटेन का उपयोग किया जाता है। 3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और इसमें गैस रिसाव का पता लगाने के लिए एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) नामक गंधयुक्त यौगिक मिलाया जाता है। 4. फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया (Fischer-Tropsch process) द्वारा जल गैस (Water gas - $CO + H_2$) के उत्प्रेरकी hydrogenation से कृत्रिम तरल हाइड्रोकार्बन (सिंथेटिक ईंधन) का निर्माण किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → यांत्रिकी के अंतर्गत कार्य, ऊर्जा, और संवेग संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किया गया कार्य मार्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और एक बंद पथ में संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है। 2. जब कोई वस्तु किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर घर्षण बल के विरुद्ध गति करती है, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) संरक्षित रहती है क्योंकि घर्षण एक आंतरिक बल के रूप में कार्य करता है। 3. पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर (Perfectly elastic collision) के मामले में, संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, तथा इस प्रकार की टक्कर के लिए प्रत्यावस्थान गुणांक (Coefficient of restitution, e) का मान ठीक एक ($e = 1$) होता है। 4. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम तब लागू होता है जब निकाय पर लगने वाला कुल बाह्य बल आघूर्ण (External torque) का मान शून्य होता है, जिसके कारण ग्रहीय गति में सूर्य के निकट आने पर ग्रह की कोणीय चाल बढ़ जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी अर्धचालक (Semiconductor) का विद्युत प्रतिरोध ताप में वृद्धि के साथ घटता है, क्योंकि तापमान बढ़ने पर सहसंयोजक बंध टूटते हैं और आवेश वाहकों (मुक्त इलेक्ट्रॉनों और होलों) की संख्या में तेजी से वृद्धि होती है, जिससे इसका प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है। 2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 3. जब समान विभव के कई सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो इस संयोजन से प्राप्त कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में काफी कम हो जाता है, जिससे यह उच्च प्रतिरोध वाले बाह्य परिपथों के लिए अत्यंत उपयोगी होता है। 4. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग किसी अज्ञात प्रतिरोध के सटीक माप के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में तब होता है जब गैल्वेनोमीटर से प्रवाहित धारा का मान शून्य होता है, जिससे समीकरण $\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$ प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों के निर्माण, उनके अपवर्तनांक तथा गोलीय सतहों के अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) $\frac{1}{f} = (n - 1) \left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$ के अनुसार, किसी लेंस की फोकस दूरी केवल उसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्या पर निर्भर करती है और उस माध्यम के अपवर्तनांक से पूर्णतः स्वतंत्र होती है जिसमें लेंस को डुबोया गया है। 2. जब किसी पतले उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी का चिन्ह बदल जाता है और वह लेंस अभिसारी (Converging) से अपसारी (Diverging) प्रकृति में परिवर्तित हो जाता है। 3. यदि किसी संयुक्त लेंस निकाय में दो पतले लेंस जिनकी फोकस दूरियाँ $f_1$ और $f_2$ हैं, एक-दूसरे के संपर्क में रखे गए हैं, तो इस संयोजन की कुल प्रभावी शक्ति (Effective Power) व्यक्तिगत लेंसों की शक्तियों के बीजगणितीय योग $P = P_1 + P_2$ के बराबर होती है। 4. एक वर्णात्मक (Achromatic) लेंस संयोजन का निर्माण करते समय यह आवश्यक होता है कि दोनों लेंसों के वर्ण विक्षेपण क्षमता (Dispersive powers) समान हों, किंतु उनके पदार्थों के लेंसों की प्रकृति (एक उत्तल और एक अवतल) विपरीत होनी चाहिए ताकि न्यूनतम विचलन प्राप्त किया जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.