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आनुवंशिकी और जैव विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत (Hardy-Weinberg Principle) के अनुसार, एक बड़ी यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाली समष्टि (Population) में जीन आवृत्तियाँ और एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं बशर्ते कि उस पर उत्परिवर्तन, चयन, जीन प्रवाह और आनुवंशिक विचलन जैसे विकासवादी कारक प्रभावी न हों।
- 2. लामार्कवाद (Lamarckism) के अनुसार जीवों द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किए जाने वाले लक्षण (Acquired characters) अगली पीढ़ी में वंशागत नहीं होते हैं, बल्कि प्राकृतिक चयन ही जैव विकास का एकमात्र प्रेरक बल है।
- 3. होमोलोगस अंग (Samajata Ang) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और भ्रूणय उत्पत्ति समान होती है, भले ही उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, और यह अभिसारी विकास (Convergent evolution) का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
- 4. आनुवंशिक अपवाह (Genetic Drift) एक यादृच्छिक प्रक्रिया है जो छोटी समष्टियों में विशेष रूप से प्रभावी होती है, जिससे बिना किसी अनुकूलन लाभ के एलील आवृत्तियों में अचानक और अप्रत्याशित परिवर्तन आ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि हार्डी-वीनबर्ग साम्य (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, आदर्श परिस्थितियों में किसी समष्टि की जीन और एलील आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि लामार्कवाद 'अर्जित लक्षणों की वंशागति' पर आधारित है, जबकि प्राकृतिक चयन डार्विनवाद का सिद्धांत है। कथन 3 गलत है क्योंकि समझत अंग (Homologous organs) 'अपसारी विकास' (Divergent evolution) का प्रमाण देते हैं, न कि अभिसारी विकास का। कथन 4 सही है क्योंकि आनुवंशिक अपवाह छोटी समष्टियों में यादृच्छिक रूप से एलील आवृत्तियों को बदल देता है। विकिपीडिया संदर्भ।
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आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार…
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Related Questions
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ सेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) का पालन करता है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो उसी परिनालिका में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होने की इस परिघटना को 'स्वप्रेरण' (Self-induction) कहा जाता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) में धातुओं को पिघलाने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न रोगों, उनके संचरण के माध्यमों और रोगजनकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ट्रेकोमा' (Trachoma) एक नेत्र संक्रमण है जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नामक जीवाणु के कारण होता है, और यह कंजंक्टिवा तथा कॉर्निया को प्रभावित करके बार-बार संक्रमण के फलस्वरूप पलकों के अंदर की ओर मुड़ने (ट्राइकियासिस) और अंधेपन का कारण बन सकता है।
2. 'एन्सेफलाइटिस' या जापानी जापानी बुखार एक विषाणु जनित रोग है जो मुख्य रूप से क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलता है और इसके विषाणु मानव केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
3. 'प्रिओन रोग' (Prion diseases) संक्रामक एजेंटों द्वारा होते हैं जिनमें न्यूक्लिक एसिड (DNA या RNA) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, और यह मुख्य रूप से तंत्रिका ऊतकों को नष्ट कर स्पॉन्जी जैसी संरचना बनाते हैं।
4. 'सिफलिस' (Syphilis) एक जीवाणु जनित यौन संचारित संक्रमण है जो ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक स्पिरोकीट जीवाणु के कारण होता है, और इसके प्राथमिक चरण में जननांगों पर 'चाँकर' (Chancre) नामक दर्द रहित घाव उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तरल पदार्थों के भौतिक गुणों जैसे पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की सतह पर पृष्ठ तनाव का कारण अणुओं के मध्य लगने वाला ससंजक बल है, और यदि किसी द्रव में घुलनशील अशुद्धियाँ (जैसे डिटर्जेंट) मिलाई जाती हैं, तो द्रव का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।
2. श्यानता द्रवों का वह आंतरिक गुण है जो उनकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है, और तापमान में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ जाती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह बल विस्थापित द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है।
4. यदि कोई वस्तु किसी ऐसे द्रव में तैर रही है जिसका घनत्व वस्तु के औसत घनत्व से कम है, तो वस्तु का आयतन द्रव के अंदर न्यूनतम होगा और विस्थापित द्रव का भार वस्तु के आंशिक भार से कम होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) और अम्ल-क्षार सिद्धांत (Acid-Base Theories) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक बंध (Ionic Bond) का निर्माण दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की पूरी तरह से साझेदारी से होता है, और आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में भी विद्युत और ऊष्मा के उत्कृष्ट चालक होते हैं क्योंकि उनके आयन गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी सिद्धांत (Bronsted-Lowry Theory) के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो प्रोटॉन ($H^+$ दाता) होते हैं, जबकि क्षार वे पदार्थ हैं जो प्रोटॉन ग्रहण करते हैं ($H^+$ ग्राही), और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) हमेशा अत्यंत दुर्बल होता है।
3. लेविस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक प्रजातियाँ होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लेविस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता होते हैं।
4. जल का ऑटो-प्रोटोलिसिस (Auto-protolysis) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जल के दो अणु परस्पर क्रिया करके हाइड्रोनियम आयन ($H_3O^+$) और हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH^-$) बनाते हैं, और $298 ext{ K}$ पर इसके आयनिक गुणनफल ($K_w$) का मान सदैव $1.0 imes 10^{-7} ext{ mol}^2 ext{ L}^{-2}$ होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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