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आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हार्डी-वीनबर्ग साम्यावस्था (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, किसी बड़ी यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाली समष्टि में जीन आवृत्तियाँ और एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं, यदि उस पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह और आनुवंशिक अपवाह जैसे विकासवादी बल कार्य न कर रहे हों।
- 2. थॉमस मॉर्गन द्वारा ड्रोसोफिला पर किए गए प्रयोगों में यह देखा गया कि जब दो जीन एक ही गुणसूत्र पर अत्यधिक पास स्थित होते हैं, तो उनके बीच 'पुनर्योजन आवृत्ति' (Recombination frequency) बहुत अधिक होती है, जिसे उन्होंने 'सहलग्नता' (Linkage) नाम दिया था।
- 3. ह्यूगो डी व्रीज (Hugo de Vries) के उत्परिवर्तन सिद्धांत के अनुसार, जैव विकास एक क्रमिक और धीमी प्रक्रिया है जो प्राकृतिक चयन के माध्यम से संचयी सूक्ष्म परिवर्तनों के कारण होती है, न कि अचानक होने वाले बड़े उत्परिवर्तनों से।
- 4. समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और भ्रूणय उत्पत्ति समान होती है, भले ही उनके कार्य भिन्न-भिन्न हों, और यह 'अपसारी विकास' (Divergent evolution) का उत्कृष्ट प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत यह बताता है कि आदर्श स्थितियों में समष्टि की जीन आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि थॉमस मॉर्गन के अनुसार, यदि दो जीन गुणसूत्र पर बहुत पास होते हैं, तो उनके बीच पुनर्योजन आवृत्ति बहुत 'कम' होती है और सहलग्नता (Linkage) मजबूत होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि ह्यूगो डी व्रीज के अनुसार जैव विकास अचानक होने वाले बड़े उत्परिवर्तनों (सॉल्टेशन या Saltation) के कारण होता है, न कि क्रमिक परिवर्तनों से। कथन 4 सही है, समजात अंग (Homologous organs) अपसारी विकास को दर्शाते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न रोगों, उनके संचरण के माध्यमों और रोगजनकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ट्रेकोमा' (Trachoma) एक नेत्र संक्रमण है जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नामक जीवाणु के कारण होता है, और यह कंजंक्टिवा तथा कॉर्निया को प्रभावित करके बार-बार संक्रमण के फलस्वरूप पलकों के अंदर की ओर मुड़ने (ट्राइकियासिस) और अंधेपन का कारण बन सकता है।
2. 'एन्सेफलाइटिस' या जापानी जापानी बुखार एक विषाणु जनित रोग है जो मुख्य रूप से क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलता है और इसके विषाणु मानव केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
3. 'प्रिओन रोग' (Prion diseases) संक्रामक एजेंटों द्वारा होते हैं जिनमें न्यूक्लिक एसिड (DNA या RNA) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, और यह मुख्य रूप से तंत्रिका ऊतकों को नष्ट कर स्पॉन्जी जैसी संरचना बनाते हैं।
4. 'सिफलिस' (Syphilis) एक जीवाणु जनित यौन संचारित संक्रमण है जो ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक स्पिरोकीट जीवाणु के कारण होता है, और इसके प्राथमिक चरण में जननांगों पर 'चाँकर' (Chancre) नामक दर्द रहित घाव उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त समूह 'O' वाले व्यक्तियों के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्रकार के एंटीबॉडी प्राकृतिक रूप से उपस्थित होते हैं, जिसके कारण इस रक्त समूह को 'सार्वभौमिक ग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है।
2. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस (Erythroblastosis fetalis) एक ऐसी स्थिति है जो तब उत्पन्न हो सकती है जब आरएच-ऋणात्मक (Rh-negative) पिता और आरएच-धनात्मक (Rh-positive) माता का गर्भधारण होता है, जिससे पहले बच्चे की जन्म के समय मृत्यु हो सकती है।
3. एबीओ (ABO) रक्त समूह प्रणाली की वंशागति सह-प्रभाविता (Co-dominance) और बहुयुग्मविकल्पी (Multiple Allelism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ एलील $I^A$ और $I^B$ दोनों एक साथ उपस्थित होने पर अपने स्वतंत्र लक्षणों को समान रूप से प्रदर्शित करते हैं।
4. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया के दौरान, प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए थ्रोम्बोप्लास्टिन और कैल्शियन आयन ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और यह उत्प्रेरित क्रिया मुख्य रूप से यकृत द्वारा स्रावित फाइब्रिनोजेन प्रोटीन पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकैरियोटिक कोशिका के विभिन्न अंगकों और कोशिका विभाजन (Cell Cycle and Division) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रक झिल्ली का बाहरी आवरण अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) के साथ निरंतर जुड़ा होता है, और इसकी बाहरी सतह पर राइबोसोम जुड़े हो सकते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करते हैं।
2. सूत्रकणिका (माइटोकॉन्ड्रिया) और हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिका अंगक हैं, क्योंकि इनमें स्वयं का वृत्ताकार डीएनए, आरएनए और 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।
3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन (Diplotene) अवस्था के दौरान, समजात गुणसूत्रों के अलग होने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन वे 'क्याज़्माटा' (Chiasmata) नामक बिंदुओं पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, जो कि क्रॉसिंग ओवर के स्थल को दर्शाते हैं।
4. पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के दौरान साइटोकाइनेसिस (द्रव्य विभाजन) की प्रक्रिया कोशिका पट्टिका (Cell plate) के निर्माण द्वारा होती है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से गॉल्जीकाय के स्रावी पुटिकाओं (Vesicles) द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तरल पदार्थों के भौतिक गुणों जैसे पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की सतह पर पृष्ठ तनाव का कारण अणुओं के मध्य लगने वाला ससंजक बल है, और यदि किसी द्रव में घुलनशील अशुद्धियाँ (जैसे डिटर्जेंट) मिलाई जाती हैं, तो द्रव का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।
2. श्यानता द्रवों का वह आंतरिक गुण है जो उनकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है, और तापमान में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ जाती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह बल विस्थापित द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है।
4. यदि कोई वस्तु किसी ऐसे द्रव में तैर रही है जिसका घनत्व वस्तु के औसत घनत्व से कम है, तो वस्तु का आयतन द्रव के अंदर न्यूनतम होगा और विस्थापित द्रव का भार वस्तु के आंशिक भार से कम होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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