BaalVikas
Menu
General Science
Asked 11 hours ago · Viewed 0 times

विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ सेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  2. 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) का पालन करता है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
  3. 3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो उसी परिनालिका में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होने की इस परिघटना को 'स्वप्रेरण' (Self-induction) कहा जाता है।
  4. 4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) में धातुओं को पिघलाने के लिए किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के *समानुपाती* होता है, व्युत्क्रमानुपाती नहीं। कथन 2 सत्य है; लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है क्योंकि प्रेरित धारा का विरोध करने के लिए यांत्रिक कार्य करना पड़ता है जो विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता है। कथन 3 सत्य है, जब किसी कुंडली या परिनालिका में प्रवाहित धारा बदलती है, तो उससेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण उसी में प्रेरित EMF उत्पन्न होता है जिसे स्वप्रेरण कहते हैं। कथन 4 भी सत्य है; भंवर धाराएँ (या फूको धाराएँ) धात्विक पिंडों में उत्पन्न होने वाली प्रेरित चक्राकार धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक और प्रेरण भट्टियों में किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:
अगला प्रश्न → मानव शरीर में होने वाले विभिन्न रोगों, उनके संचरण के माध्यमों और रोगजनकों के… ← पिछला प्रश्न आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में…

Related Questions

→ मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रक्त समूह 'O' वाले व्यक्तियों के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्रकार के एंटीबॉडी प्राकृतिक रूप से उपस्थित होते हैं, जिसके कारण इस रक्त समूह को 'सार्वभौमिक ग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है। 2. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस (Erythroblastosis fetalis) एक ऐसी स्थिति है जो तब उत्पन्न हो सकती है जब आरएच-ऋणात्मक (Rh-negative) पिता और आरएच-धनात्मक (Rh-positive) माता का गर्भधारण होता है, जिससे पहले बच्चे की जन्म के समय मृत्यु हो सकती है। 3. एबीओ (ABO) रक्त समूह प्रणाली की वंशागति सह-प्रभाविता (Co-dominance) और बहुयुग्मविकल्पी (Multiple Allelism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ एलील $I^A$ और $I^B$ दोनों एक साथ उपस्थित होने पर अपने स्वतंत्र लक्षणों को समान रूप से प्रदर्शित करते हैं। 4. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया के दौरान, प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए थ्रोम्बोप्लास्टिन और कैल्शियन आयन ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और यह उत्प्रेरित क्रिया मुख्य रूप से यकृत द्वारा स्रावित फाइब्रिनोजेन प्रोटीन पर निर्भर करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, किसी बंद कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन नहीं करता है, क्योंकि प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस बाह्य चुंबकीय क्षेत्र का समर्थन करती है जिसके कारण वह उत्पन्न होती है। 3. जब किसी चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार घुमाया जाता है कि उसका घूर्णन तल चुंबकीय बल रेखाओं के लंबवत हो, तो कुंडली में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा प्रत्येक आधे चक्कर के बाद बदल जाती है, जो कि प्रत्यावर्ती धारा (AC) का मूल सिद्धांत है। 4. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → आनुवंशिकी और जैव विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत (Hardy-Weinberg Principle) के अनुसार, एक बड़ी यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाली समष्टि (Population) में जीन आवृत्तियाँ और एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं बशर्ते कि उस पर उत्परिवर्तन, चयन, जीन प्रवाह और आनुवंशिक विचलन जैसे विकासवादी कारक प्रभावी न हों। 2. लामार्कवाद (Lamarckism) के अनुसार जीवों द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किए जाने वाले लक्षण (Acquired characters) अगली पीढ़ी में वंशागत नहीं होते हैं, बल्कि प्राकृतिक चयन ही जैव विकास का एकमात्र प्रेरक बल है। 3. होमोलोगस अंग (Samajata Ang) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और भ्रूणय उत्पत्ति समान होती है, भले ही उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, और यह अभिसारी विकास (Convergent evolution) का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। 4. आनुवंशिक अपवाह (Genetic Drift) एक यादृच्छिक प्रक्रिया है जो छोटी समष्टियों में विशेष रूप से प्रभावी होती है, जिससे बिना किसी अनुकूलन लाभ के एलील आवृत्तियों में अचानक और अप्रत्याशित परिवर्तन आ जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → यूकैरियोटिक कोशिका के विभिन्न अंगकों और कोशिका विभाजन (Cell Cycle and Division) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्रक झिल्ली का बाहरी आवरण अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) के साथ निरंतर जुड़ा होता है, और इसकी बाहरी सतह पर राइबोसोम जुड़े हो सकते हैं जो प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करते हैं। 2. सूत्रकणिका (माइटोकॉन्ड्रिया) और हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिका अंगक हैं, क्योंकि इनमें स्वयं का वृत्ताकार डीएनए, आरएनए और 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं। 3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन (Diplotene) अवस्था के दौरान, समजात गुणसूत्रों के अलग होने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन वे 'क्याज़्माटा' (Chiasmata) नामक बिंदुओं पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, जो कि क्रॉसिंग ओवर के स्थल को दर्शाते हैं। 4. पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के दौरान साइटोकाइनेसिस (द्रव्य विभाजन) की प्रक्रिया कोशिका पट्टिका (Cell plate) के निर्माण द्वारा होती है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से गॉल्जीकाय के स्रावी पुटिकाओं (Vesicles) द्वारा किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.