General Science
Asked 9 hours ago · Viewed 0 times
विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, किसी बंद कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है।
- 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन नहीं करता है, क्योंकि प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस बाह्य चुंबकीय क्षेत्र का समर्थन करती है जिसके कारण वह उत्पन्न होती है।
- 3. जब किसी चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार घुमाया जाता है कि उसका घूर्णन तल चुंबकीय बल रेखाओं के लंबवत हो, तो कुंडली में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा प्रत्येक आधे चक्कर के बाद बदल जाती है, जो कि प्रत्यावर्ती धारा (AC) का मूल सिद्धांत है।
- 4. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फैराडे के नियम के अनुसार प्रेरित ईएमएफ चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन की समय-दर के समानुपाती होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है; प्रेरित धारा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न होती है (समर्थन नहीं करती)। कथन 3 सही है, जनित्र (Generator) में आर्मचर के घूमने पर चुंबकीय फ्लक्स बदलता है जिससे प्रत्येक अर्ध-चक्र के पश्चात धारा की दिशा उत्क्रमित हो जाती है। कथन 4 सही है, स्वप्रेरण (Self-induction) परिपथ में धारा परिवर्तन का विरोध करता है और इसका मात्रक हेनरी है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों तथा उनके उपचार…
← पिछला प्रश्न
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के…
Related Questions
→
विद्युत चुम्बकत्व और प्रेरण परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है, और यह लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है।
2. जब किसी बंद कुंडली से जुड़े चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन किया जाता है, तो उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण फ्लक्स परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है, जिसे फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम कहा जाता है।
3. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तनों का समर्थन करती है, और इसका एसआई मात्रक फैराड (Farad) होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) तथा विद्युत ब्रेक में ब्रेकिंग प्रभाव उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिक्रमण अवधि ठीक 24 घंटे होती है और यह पृथ्वी की विषुवत रेखा के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाता है, तथा इसकी सतह से कक्षीय ऊँचाई लगभग 36,000 किलोमीटर होती है।
3. जब कोई उपग्रह अपनी कक्षा की ऊँचाई में वृद्धि करता है, तो उसकी कक्षीय चाल (Orbital Speed) और कुल ऊर्जा दोनों में वृद्धि होती है।
4. यदि किसी उपग्रह की कक्षीय चाल को उसके वर्तमान मान से $\sqrt{2}$ गुना (या लगभग 41.4%) बढ़ा दिया जाए, तो वह उपग्रह अपनी वृत्ताकार कक्षा को छोड़कर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल जाएगा और सौरमंडल में पलायन कर जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव शरीर में होने वाले विभिन्न रोगों, उनके संचरण के माध्यमों और रोगजनकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ट्रेकोमा' (Trachoma) एक नेत्र संक्रमण है जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नामक जीवाणु के कारण होता है, और यह कंजंक्टिवा तथा कॉर्निया को प्रभावित करके बार-बार संक्रमण के फलस्वरूप पलकों के अंदर की ओर मुड़ने (ट्राइकियासिस) और अंधेपन का कारण बन सकता है।
2. 'एन्सेफलाइटिस' या जापानी जापानी बुखार एक विषाणु जनित रोग है जो मुख्य रूप से क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलता है और इसके विषाणु मानव केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
3. 'प्रिओन रोग' (Prion diseases) संक्रामक एजेंटों द्वारा होते हैं जिनमें न्यूक्लिक एसिड (DNA या RNA) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, और यह मुख्य रूप से तंत्रिका ऊतकों को नष्ट कर स्पॉन्जी जैसी संरचना बनाते हैं।
4. 'सिफलिस' (Syphilis) एक जीवाणु जनित यौन संचारित संक्रमण है जो ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक स्पिरोकीट जीवाणु के कारण होता है, और इसके प्राथमिक चरण में जननांगों पर 'चाँकर' (Chancre) नामक दर्द रहित घाव उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ सेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) का पालन करता है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो उसी परिनालिका में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होने की इस परिघटना को 'स्वप्रेरण' (Self-induction) कहा जाता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) में धातुओं को पिघलाने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.