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मानव रोगों और उनके सूक्ष्मजीवीय कारकों या उपचारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्षयरोग (Tuberculosis) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' के कारण होता है, और इसके उपचार के लिए डॉट्स (DOTS) रणनीति के अंतर्गत आइसोनियाज़िद, रिampिसिन, पाइराजिनामाइड और एथमब्यूटोल जैसी औषधियों का उपयोग किया जाता है।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, एड्स (AIDS) एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है जो ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) के कारण होता है, और यह वायरस मुख्य रूप से शरीर की सहायक टी-कोशिकाओं ($CD4^+$ T-cells) पर आक्रमण कर प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है।
- 3. मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम का संक्रमण मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है, जिसमें 'स्पोरोज़ोइट' (Sporozoite) संक्रामक अवस्था होती है, जो मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले यकृत कोशिकाओं में अलैंगिक जनन करती है।
- 4. कुष्ठ रोग (Leprosy), जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, एक विषाणु जनित संक्रामक बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र और त्वचा को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि क्षयरोग (Tuberculosis) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक जीवाणु से होता है और इसके उपचार हेतु डॉट्स (DOTS) प्रणाली के तहत समेकित औषधीय थेरेपी (HRZE) दी जाती है। कथन 2 सही है क्योंकि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार एड्स एक रेट्रोवायरस (HIV) जनित रोग है जो $CD4^+$ टी-लिम्फोसाइट्स को नष्ट कर प्रतिरक्षा तंत्र को क्षीण करता है। कथन 3 सही है, प्लाज्मोडियम का संक्रामक रूप स्पोरोज़ोइट होता है जो मादा एनोफिलीज द्वारा संचरित होकर यकृत में गुणन करता है। कथन 4 गलत है क्योंकि कुष्ठ रोग (Leprosy / Hansen's disease) एक जीवाणु (Mycobacterium leprae) जनित रोग है, न कि विषाणु जनित।
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ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) के संचरण के दौरान माध्यम के कण तरंग की दिशा के समांतर कंपन करते हैं, जिससे माध्यम में संपीडन (Compressions) और विरलन (Rarefactions) क्षेत्रों का निर्माण होता है, और इन क्षेत्रों के गुजरने पर माध्यम का घनत्व और दाब दोनों परिवर्तित होते हैं।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, किसी गैस में ध्वनि की चाल गैस के घनत्व के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, तथा तापमान में वृद्धि होने पर ध्वनि की चाल बढ़ जाती है क्योंकि तापमान बढ़ने से गैस के अणुओं की औसत चाल और प्रत्यास्थता में वृद्धि होती है।
3. लाप्लास द्वारा न्यूटन के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक समतापीय (Isothermal) प्रक्रिया के बजाय रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि ध्वनि तरंगों का संचरण इतनी तीव्र गति से होता है कि उत्पन्न होने वाली ऊष्मा को बाहर जाने या अंदर आने का पर्याप्त समय नहीं मिलता है।
4. जब कोई ध्वनि स्रोत श्रोता की ओर गति करता है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से अधिक प्रतीत होती है, और यह प्रभाव 'डॉप्लर प्रभाव' (Doppler Effect) कहलाता है, जो केवल प्रकाश तरंगों पर लागू होता है, यांत्रिक ध्वनि तरंगों पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र और विभिन्न हॉर्मोनों के स्राव तथा उनके नियंत्रण तंत्र (Feedback Mechanisms) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'गोनाडोट्रो핀-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior Pituitary) को प्रेरित करता है ताकि वह ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) का स्राव कर सके।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, थाइरॉक्सिन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) हॉर्मोनों का स्तर कम होने पर हाइपोथैलेमस 'थायरोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (TRH) का स्राव बढ़ाता है, जो सकारात्मक पुनर्भरण (Positive Feedback) के माध्यम से पीयूष ग्रंथि को टीएसएच (TSH) जारी करने के लिए उत्तेजित करता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में उपस्थित अल्फा कोशिकाएं 'ग्लੂकागोन' हॉर्मोन का स्राव करती हैं, जो ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) और ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है।
4. एट्रियल नेट्रियूरेटिक फैक्टर (ANF) हृदय की अलिंद दीवारों द्वारा स्रावित एक पेप्टाइड हॉर्मोन है, जो रक्तचाप बढ़ने पर स्रावित होता है और वाहिकाप्रसार (Vasodilation) को प्रेरित करके रक्तचाप को घटाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका चक्र (Cell Cycle) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इंटरफे फेज (Interphase) के 'S-चरण' (Synthesis phase) के दौरान डीएनए का द्विगुणन (Replication) होता है, और यदि द्विगुणित कोशिका में $G_1$ चरण में गुणसूत्रों की संख्या $2n$ और डीएनए की मात्रा $2C$ है, तो S चरण के पूरा होने पर गुणसूत्रों की संख्या बढ़कर $4n$ हो जाती है जबकि डीएनए की मात्रा $4C$ बनी रहती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की प्रोफेज-I की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था में 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing Over) होता है, जो नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय है और यह 'रीकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है।
3. माइटोसिस (Mitosis) की एनाफेज (Anaphase) अवस्था में सेंट्रोमियर का विभाजन होता है, जिससे सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्येक ध्रुव पर पहुँचने वाले गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका के समान होती है।
4. माइटोटिक स्पिंडल (Mitotic spindle) का निर्माण माइक्रोट्यूब्यूल्स (सूक्ष्म नलिकाओं) द्वारा होता है, और 'कोल्चicine' (Colchicine) नामक रसायन स्पिंडल तंतुओं के बहुलीकरण को रोककर कोशिका विभाजन को एनाफेज अवस्था में ही स्थायी रूप से रोक देता है, जिससे बहुगुणितता (Polyploidy) प्रेरित होती है।
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पदार्थ के सामान्य गुणों, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की श्यानता (Viscosity) उसकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करती है, और ताप बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घटती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पृष्ठ तनाव (Surface tension) किसी द्रव के पृष्ठ पर एकांक लंबाई पर लगने वाला बल है, और जल में साबुन या डिटर्जेंट मिलाने पर इसका पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है, जिससे यह मैल को अधिक प्रभावी ढंग से साफ कर पाता है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावक बल का अनुभव करती है, जिसका केंद्र विस्थापित तरल के द्रव्यमान केंद्र पर संकेंद्रित होता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' (Center of Buoyancy) कहते हैं।
4. यदि किसी कृत्रिम उपग्रह के अंदर पूर्ण भारहीनता की स्थिति हो, तो केशिका नली (Capillary tube) में द्रव नली के शीर्ष तक चढ़ जाएगा क्योंकि ऐसी स्थिति में केशिकत्व (Capillarity) का प्रभाव अनंत हो जाता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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