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पदार्थ की अवस्थाओं, परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्लाज़्मा और बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC) दोनों ही पदार्थ की उच्च ऊर्जा और अत्यंत निम्न तापमान वाली अवस्थाएँ हैं, जहाँ BEC का निर्माण लगभग परम शून्य ताप पर बोसॉन कणों के एक ही क्वांटम अवस्था में संघनन (Condensation) के कारण होता है।
  2. 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) के अनुसार किसी कण की स्थिति और संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण असंभव है, तथा यह नियम बोर के परमाणु मॉडल की उस अवधारणा का खंडन करता है जिसमें इलेक्ट्रॉनों के लिए निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं की परिकल्पना की गई थी।
  3. 3. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार यह कठिनाई आई कि त्वरित गति करते हुए इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का विकिरण करेंगे, जिससे अंततः उनका नाभिक में गिर जाना चाहिए था, जिसे बाद में समरफील्ड ने अपने दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं के सिद्धांत द्वारा पूरी तरह ठीक किया।
  4. 4. पावली का अपवर्जन नियम (Pauli Exclusion Principle) यह निर्धारित करता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s$) का मान सर्वदा भिन्न होना चाहिए, जिसके कारण एक ही कक्षक में विपरीत चक्रण (Opposite spins) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC) अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute Zero) के निकट ठंडा करने पर बनता है जहाँ बोसॉन एक ही क्वांटम अवस्था में आ जाते हैं। कथन 2 सही है; हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत (डेल्टा x * डेल्टा p >= h/4pi) निश्चित कक्षाओं के बोर के विचार के विपरीत है क्योंकि यह अनिश्चितता को अनिवार्य बताता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, परमाणु संरचना और क्वांटम मॉडल आधुनिक भौतिकी के आधार हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि रदरफोर्ड मॉडल की इस ऊर्जा क्षय की समस्या को बोर ने अपनी 'स्थाई कक्षाओं' (Stationary orbits) की परिकल्पना से हल किया था, न कि समरफील्ड ने (समरफील्ड ने केवल दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं और सोमरफील्ड फाइन स्ट्रक्चर को जोड़ा था)। कथन 4 सही है, पावली का अपवर्जन नियम बताता है कि एक ही कक्षक के दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं।
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