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History of India
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मलिक काफूर ने अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद लगभग कितने दिनों तक शासन का वास्तविक नियंत्रण अपने हाथ में रखा?

Detailed Explanation

काफूर ने लगभग 35 दिनों तक शासन संभाला।
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→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में सर ह्यूरोज़ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने कड़ा प्रतिरोध किया और तात्या टोपे की सहायता से कलपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ तात्या टोपे के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध पुनः संघर्ष किया। 2. कलपी के युद्ध में पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ सिंधिया ने अंग्रेजों की शरण ली। 3. ग्वालियर के पतन के उपरांत जून 1858 में लड़े गए अंतिम निर्णायक युद्ध में सर ह्यूरोज़ की सेना के विरुद्ध लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे यहाँ से बचकर नेपाल की तराई में चले गए और कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक स्वरूप, संतों एवं उनके सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, तथा इनमें 'आलवार' संतों की कुल संख्या बारह और 'नयनार' संतों की संख्या त्रेसठ मानी जाती है, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जातिगत ऊँच-नीच का कड़ा विरोध किया। 2. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धद्वैतवाद' (Pure Non-dualism) के दर्शन का प्रतिपादन किया और पुष्टि मार्ग की स्थापना की, जिसके अंतर्गत भगवान कृष्ण की बाल रूप में अनन्य भक्ति पर विशेष बल दिया गया। 3. सूफी संत मियाॅं मीर, जो कादिरिया सिलसिले से संबंधित थे, ने लाहौर में प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर (हरिमंदिर साहिब) की नींव रखी थी, तथा वे सिख गुरु अर्जुन देव के समकालीन और आध्यात्मिक मित्र थे। 4. मध्यकालीन संत कबीर और नानक दोनों ने ही निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल दिया और मूर्तिपूजा, बाह्य आडंबरों, तथा तीर्थयात्राओं का जोरदार खंडन किया, किंतु कबीर ने अपने उपदेशों के लिए फारसी भाषा को माध्यम बनाया जबकि गुरु नानक ने केवल अरबी भाषा का प्रयोग किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तुत '3 जून योजना' (माउंटबेटन योजना, 1947) और उसके क्रियान्वयन के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों का यह प्रावधान किया गया था कि दोनों प्रांतों के हिन्दू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्य अलग-अलग बैठक करके यह निर्णय लेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाए या नहीं। 2. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Plebiscite) का प्रावधान किया गया था। 3. योजना के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान के बीच शक्तियों के हस्तांतरण तथा सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (पंजाब और बंगाल के लिए) का गठन किया गया था, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से पहले ही अपनी सीमा रिपोर्ट सौंप दी थी। 4. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 में यह स्पष्ट किया गया था कि 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया जाएगा और ब्रिटिश राजमुकुट का भारतीय रियाسतों पर सर्वोच्च अधिकार समाप्त हो जाएगा, जिससे रियासतों को यह छूट मिल गई कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों अथवा स्वतंत्र रहें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का विलय वर्ष 1856 में कुशासन के झूठे आधार पर किया गया, जिससे अवध के सैनिकों और पारंपरिक अभिजात वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त हुआ। 2. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की पक्षपातपूर्ण मुक्त व्यापार नीति के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गए, क्योंकि ब्रिटिश आयातित सूती वस्त्रों पर नाममात्र का शुल्क लगाया गया था, जबकि भारतीय उत्पादों पर भारी निर्यात शुल्क वसूला जाता था। 3. सैन्य कारणों के अंतर्गत वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत बंगाल आर्मी के नए रंगरूटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार विदेश जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया, जिसे पारंपरिक सैनिकों ने अपनी जाति और धर्मभ्रष्ट होने का गंभीर खतरा माना। 4. धार्मिक और सामाजिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा हिंदू धर्म त्यागने या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों को पैतृक संपत्ति से वंचित रखने के प्राचीन विधान को समाप्त कर दिया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ब्रिटिश शासन द्वारा धर्मांतरण को बढ़ावा देने का सीधा षड्यंत्र माना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → गुप्तकालीन प्रशासन, राजस्व प्रणाली तथा आर्थिक जीवन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भूमि की माप और उसके वर्गीकरण के लिए 'क्षेत्र' (कृषि योग्य भूमि), 'वापस' या 'वाप्र' (माप की इकाई), और 'अखिल' (बिना जोती गई या परती भूमि) जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता था। 2. गुप्त सम्राटों के शासनकाल में राजा को मिलने वाला भू-राजस्व (कर) सामान्यतः उपज का 1/6 से 1/4 भाग होता था, जिसे 'भाग' या 'भोग' कहा जाता था, जबकि संकटकालीन स्थिति में 'हिरण्य' (नकद कर) और 'उद्रंग' (स्थाई कर) वसूले जाते थे। 3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में आंतरिक और बाह्य व्यापार दोनों का उल्लेख मिलता है, जहाँ पश्चिमी रोमन साम्राज्य के पतन के बाद भारतीय व्यापारियों ने दक्षिण-पूर्व एशिया (सुवर्णद्वीप) के साथ समुद्री व्यापार को अधिक बढ़ावा दिया, जिससे ताम्रलिप्ती और भृगुकच्छ (बरूच) प्रमुख बंदरगाह के रूप में उभरे। 4. गुप्त साम्राज्य में पुलिस और आंतरिक सुरक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को 'महादंडनायक' कहा जाता था, तथा न्याय प्रशासन अत्यंत कठोर था जिसमें गुप्तचर विभाग के अधिकारियों को 'दूताभिसारिका' कहा जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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