प्रकार्यवाद (Functionalism) सम्प्रदाय के जनक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रकार्यवाद (Functionalism) मनोविज्ञान का एक प्रमुख ऐतिहासिक संप्रदाय है, जिसके संस्थापक विलियम जेम्स (William James) को माना जाता है। उनके साथ जॉन डेवी, जेम्स एंजेल और एडवर्ड थार्नडाइक जैसे विचारक भी इस विचारधारा से जुड़े रहे। प्रकार्यवाद इस बात पर जोर देता है कि मन और चेतना का अध्ययन केवल संरचना के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि मस्तिष्क और मानसिक प्रक्रियाएं किस प्रकार व्यक्ति को अपने पर्यावरण के अनुकूल ढलने (adaptation) में सहायता करती हैं। विलियम जेम्स की प्रसिद्ध पुस्तक 'प्रिंसिपल ऑफ साइकोलॉजी' (1890) ने इस दिशा में क्रांतिकारी योगदान दिया। यह संप्रदाय चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत से अत्यधिक प्रभावित था और यह मानता था कि व्यवहार और मानसिक गतिविधियाँ जीवों की उत्तरजीविता और कार्यों को पूरा करने के लिए उपयोगी होती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इस सिद्धांत ने 'करके सीखना' (Learning by doing) और बाल-केंद्रित शिक्षा को अत्यधिक बढ़ावा दिया।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- विलियम जेम्स को अमेरिकी मनोविज्ञान का जनक भी कहा जाता है।
- प्रकार्यवाद चेतना की संरचना (Structure) के बजाय उसके कार्य (Function) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- विकल्प (a) थार्नडाइक 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' और आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान के लिए जाने जाते हैं।
- विकल्प (b) स्पीयरमैन बुद्धि के 'द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) के प्रतिपादक हैं।
- विकल्प (d) अल्फ्रेड बिने और साइमन ने पहला औपचारिक बुद्धि परीक्षण (1905) विकसित किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: मनोविज्ञान के इतिहास में संरचनावाद के विरोध में प्रकार्यवाद का उदय हुआ। यह संप्रदाय व्यावहारिक उपयोगिता और प्रयोजनवाद पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए प्रकार्यवाद का सिद्धांत और बाल विकास के अन्य संप्रदायों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, STET) में मनोविज्ञान के विभिन्न स्कूलों (जैसे संरचनावाद, प्रकार्यवाद, गेस्टाल्टवाद, व्यवहारवाद) से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। प्रकार्यवाद इस बात पर बल देता है कि शिक्षण विधियाँ ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों के व्यावहारिक जीवन और समस्याओं के समाधान में सहायक हों। जॉन डेवी द्वारा प्रतिपादित 'प्रोजेक्ट मेथड' और 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) इसी प्रकार्यवादी विचारधारा की देन हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि विलियम जेम्स ने चेतना को एक 'प्रवाह' (Stream of Consciousness) के रूप में परिभाषित किया था, जो खंडित नहीं होती। ऐसे वैचारिक अंतरों को समझकर ही परीक्षार्थी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।