विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
विकासात्मक मनोविज्ञान (Developmental Psychology) मानव जीवन में जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक होने वाले शारीरिक, मानसिक, भाषात्मक, संवेगात्मक और सामाजिक परिवर्तनों का अध्ययन करता है। इस क्षेत्र में स्विस मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे का योगदान सबसे अधिक मौलिक और क्रांतिकारी माना जाता है। जीन पियाजे ने बच्चों के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) का अध्ययन करके यह प्रतिपादित किया कि बच्चे अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं करते हैं और उनकी सोच वयס्कों से गुणात्मक रूप से भिन्न होती है। उन्होंने बच्चों के विकास को चार स्पष्ट अवस्थाओं (संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक और औपचारिक संक्रियात्मक) में विभाजित किया। इसलिए विकासात्मक मनोविज्ञान के अंतर्गत बाल विकास और संज्ञानात्मक संरचनाओं के विश्लेषण के लिए जीन पियाजे को प्रमुख प्रतिपादक के रूप में मान्यता दी जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बालक किस प्रकार धीरे-धीरे अपने परिवेश से अंतःक्रिया करते हुए सीखते हैं और मानसिक रूप से परिपक्व होते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जीन पियाजे ने बाल विकास को मुख्य रूप से 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के माध्यम से समझाया, जिसमें स्कीमा (Schema), आत्मसात्करण (Assimilation), समायोजन (Accommodation) और संतुलन (Equilibration) मुख्य अवधारणाएँ हैं।
- विकल्प (b) बी. एफ. स्किनर व्यवहारवाद (Behaviorism) और क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) के जनक हैं, जिनका संबंध मुख्य रूप से अधिगम से है, न कि मूल विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रतिपादन से।
- विकल्प (c) अल्फ्रेड बिने बुद्धि परीक्षण (Intelligence Testing) के इतिहास में पहले व्यावहारिक बुद्धि परीक्षण (Binet-Simon Scale) के निर्माण के लिए जाने जाते हैं।
- विकल्प (d) एल. एल. थर्स्टन बुद्धि के समूह कारक सिद्धांत (Group Factor Theory of Intelligence) के प्रतिपादक हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: विकासात्मक मनोविज्ञान और बाल विकास की रूपरेखा को समझने के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है, जो यह स्पष्ट करता है कि बच्चों की मानसिक क्षमताएं उम्र के साथ जैविक परिपक्वता और पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया के फलस्वरूप कैसे विकसित होती हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC) में विकासात्मक मनोविज्ञान से जुड़े प्रश्न अक्सर सीधे विचारकों और उनके सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत से हर वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि विकासात्मक मनोविज्ञान मानव आयु के विभिन्न चरणों में होने वाले गुणात्मक और मात्रात्मक बदलावों का वैज्ञानिक विश्लेषण करता है। पियाजे का यह मानना कि 'बच्चे सक्रिय ज्ञान निर्माता (Active builders of knowledge) तथा नन्हें वैज्ञानिक होते हैं' pedagogy के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अध्यापकों को बालकों की विकासात्मक अवस्थाओं के अनुकूल ही पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों का चयन करना चाहिए ताकि बच्चों का बौद्धिक और सर्वांगीण विकास सुगम हो सके।