व्यवहारवाद (1912) के जनक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
व्यवहारवाद (Behaviorism) मनोविज्ञान का एक प्रमुख संप्रदाय है जिसकी औपचारिक स्थापना वर्ष 1912 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जॉन ब्रॉडस वाटसन (J. B. Watson) द्वारा की गई थी। वाटसन ने मनोविज्ञान को 'चेतना का विज्ञान' मानने के पारंपरिक दृष्टिकोण को पूरी तरह खारिज करते ہوئے इसे 'व्यवहार का विज्ञान' घोषित किया। उनके अनुसार, मनोविज्ञान का मुख्य उद्देश्य मानसिक आंतरिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर देखे, मापे और परखे जा सकने वाले व्यवहार (Observable Behavior) का अध्ययन करना है। वाटसन का यह सिद्धांत उद्दीपक-अनुक्रिया (Stimulus-Response या S-R) संबंध पर अत्यधिक बल देता है, जिसके अनुसार वातावरण में मौजूद विभिन्न उद्दीपकों के प्रति प्राणी वैसी ही अनुक्रिया प्रस्तुत करता है। वाटसन ने इस बात पर भी जोर दिया कि पर्यावरण और प्रशिक्षण के माध्यम से किसी भी बच्चे को मनचाहे रूप में ढाला जा सकता है, जो बाल विकास में पर्यावरणीय कारकों की महत्ता को रेखांकित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जॉन बी. वाटसन: इन्हें व्यवहारवाद का जनक कहा जाता है जिन्होंने 1912 में 'Psychology as the Behaviorist Views It' नामक प्रसिद्ध लेख के माध्यम से इस आंदोलन की नींव रखी थी।
- बी. एफ. स्किनर: इन्होंने 'ऑपरेंट कंडीशनिंग' (क्रियाप्रसूत अनुबंधन) का सिद्धांत दिया और व्यवहारवाद को पुनर्बलन (Reinforcement) के माध्यम से आगे बढ़ाया।
- सी. एल. हल: इन्होंने 'प्रणोद न्यूनता सिद्धांत' (Drive Reduction Theory) का प्रतिपादन किया जो सीखने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
- जीन पियाजे: यह संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के जनक हैं, न कि व्यवहारवाद के।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास और शिक्षा मनोविज्ञान में व्यवहारवादी दृष्टिकोण बच्चों के अधिगम, आदत निर्माण, और कक्षा प्रबंधन में सकारात्मक व नकारात्मक पुनर्बलन के अनुप्रयोग को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम सिद्धांतों और समावेशी शिक्षा के संदर्भों को पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में मनोविज्ञान के संप्रदायों और उनके जनकों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। वाटसन का नाम आते ही छात्रों को 'व्यवहारवाद' और 'पर्यावरणीय प्रभाव' से जोड़ना चाहिए। वाटसन का प्रसिद्ध कथन है कि "मुझे एक दर्जन स्वस्थ बच्चे दो, और मैं उन्हें डॉक्टर, वकील, चोर या जो चाहूं वह बना सकता हूँ", जो उनके अत्यधिक पर्यावरणीय निर्धारणवाद (Environmental Determinism) को दर्शाता है। कक्षा कक्ष शिक्षण में पुरस्कार, प्रशंसा और प्रतिक्रिया जैसे व्यवहारवादी उपकरण छात्रों के वांछित व्यवहार को स्थापित करने में मदद करते हैं, जिससे यह टॉपिक अध्यापन शास्त्र (Pedagogy) का एक अनिवार्य हिस्सा बन जाता है।