समाजमिति विधि के प्रतिपादक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
समाजमिति विधि (Sociometric Technique) के प्रतिपादक जैकब लेवी मोरेनो (J. L. Moreno) हैं। इस विधि का मुख्य उद्देश्य किसी समूह के भीतर व्यक्तियों के बीच पारस्परिक संबंधों, सामाजिक आकर्षण, और प्रतिकर्षण का अध्ययन करना है। बाल विकास और शिक्षा मनोविज्ञान में, यह तकनीक सहपाठियों के बीच अंतःक्रिया, सामाजिक स्वीकार्यता और कक्षा के सामाजिक ढांचे (Sociogram) को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके माध्यम से शिक्षक यह जान सकते हैं कि कक्षा में कौन सा छात्र लोकप्रिय है और कौन सा छात्र उपेक्षित या अलग-थलग (Isolated) महसूस कर रहा है, जिससे समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जे. एल. मोरेनो ने 1934 में 'हू शैल सर्वाइव?' पुस्तक में समाजमिति का पहली बार प्रतिपादन किया था।
- यह गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों रूपों में सामाजिक संबंधों को मापने का कार्य करती है।
- विकल्प (b) इवान पावलाव ने 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) का सिद्धांत दिया।
- विकल्प (c) जीन पियाजे ने 'संज्ञानात्मक विकास' (Cognitive Development) का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षा मनोविज्ञान में विद्यार्थियों के सामाजिक विकास (Social Development) का मापन करने के लिए समाजमिति एक प्रमुख उपकरण है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और बाल मनोविज्ञान के विभिन्न विधियों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, REET) में मूल्यांकन और मापन की विधियों से अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। समाजमिति विधि एक ऐसी मूल्यांकन तकनीक है जिसका उपयोग शिक्षक छात्रों के व्यवहार और सामाजिक समायोजन का आकलन करने के लिए करते हैं। जब कोई शिक्षक कक्षा में पियर ग्रुप (Peer Group) के प्रभाव को समझना चाहता है या किसी बहिष्कृत बच्चे की पहचान करना चाहता है, तब मोरेनो की यह विधि सबसे प्रभावी साबित होती है। इस प्रकार के प्रश्नों को हल करने के लिए मनोवैज्ञानिकों और उनके द्वारा प्रतिपादित विधियों या सिद्धांतों की सूची को याद रखना आवश्यक है।