मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय के जनक कौन हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय (School of Behaviorism) के जनक जॉन बी. वाटसन (John B. Watson) को माना जाता है। वर्ष 1913 में वाटसन ने अपने प्रसिद्ध लेख "Psychology as the Behaviorist Views It" के माध्यम से व्यवहारवाद की नींव रखी थी। उनके अनुसार, मनोविज्ञान को चेतना या मन के अध्ययन के बजाय केवल प्रत्यक्ष और मापने योग्य व्यवहार (Observable Behavior) का अध्ययन करना चाहिए। वाटसन का यह दृष्टिकोण इस मान्यता पर आधारित था कि सभी प्रकार के व्यवहार उद्दीपन और प्रतिक्रिया (Stimulus-Response या S-R) के बीच के संबंध का परिणाम होते हैं और इन्हें पर्यावरणीय कंडीशनिंग के माध्यम से पूरी तरह से नियंत्रित या बदला जा सकता है। यही कारण है कि विकल्प (c) इस प्रश्न के लिए पूर्णतः सही उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- वाटसन ने शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) के क्षेत्र में पावलव के कार्यों को आगे बढ़ाया और 'लिटल अल्बर्ट' (Little Albert) का प्रसिद्ध प्रयोग कर यह सिद्ध किया कि भय जैसे संवेग भी सीखे (Conditioned) जा सकते हैं।
- विकल्प (a) जीन पियाजे 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के लिए जाने जाते हैं।
- विकल्प (b) स्पीयरमैन ने बुद्धि का 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) प्रतिपादित किया था।
- विकल्प (d) डेविड आसुबेल 'सार्थक मौखिक अधिगम' (Meaningful Verbal Learning) और 'अग्रिम संगठन' (Advance Organizer) मॉडल के प्रणेता हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: व्यवहारवाद इस बात पर जोर देता है कि आंतरिक मानसिक अवस्थाओं के बजाय बाहरी वातावरण और अनुभव व्यक्ति के व्यवहार को ढालते हैं। इस ऐतिहासिक दृष्टिकोण ने आधुनिक शिक्षाशास्त्र में पुनर्बलन (Reinforcement) और अभ्यास के नियमों को स्थापित किया। अधिक जानकारी के लिए अधिगम मनोविज्ञान और बाल विकास के अन्य सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC) में विभिन्न मनोवैज्ञानिक संप्रदायों और उनके संस्थापकों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। व्यवहारवाद का शिक्षा में यह योगदान है कि यह कक्षा-कक्ष प्रबंधन, सकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) और त्रुटि रहित शिक्षण तकनीकों को बढ़ावा देता है। परीक्षार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि जहाँ वाटसन व्यवहारवाद के संस्थापक हैं, वहीं स्किनर (B.F. Skinner) ने क्रियाप्रसूत अनुबंध (Operant Conditioning) के माध्यम से इसे चरम सीमा तक पहुँचाया। ऐसे प्रश्नों को हल करते समय प्रमुख वैज्ञानिकों और उनके मूल सिद्धांतों के मिलान पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।