प्रोत्साहन का सिद्धांत किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम और प्रेरणा के मनोविज्ञान में प्रोत्साहन का सिद्धांत (Incentive Theory of Motivation) यह स्पष्ट करता है कि व्यक्ति बाहरी पुरस्कारों, उद्दीपकों या प्रोत्साहनों द्वारा कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं। इस सिद्धांत के प्रमुख प्रणेता बोल्स और काफमैन (Bolles and Kaufman) माने जाते हैं। इसके अनुसार, आंतरिक जैविक आवश्यकताओं के अतिरिक्त बाहरी वातावरण में मौजूद वस्तुएं, स्थितियां या पुरस्कार (जैसे धन, प्रशंसा, अंक, या मान्यता) प्राणी को एक विशिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति हेतु व्यवहार करने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। विकल्प 'c' इस प्रश्न का बिल्कुल सही उत्तर है क्योंकि बोल्स व काफमैन ने प्रेरणा चक्र में प्रोत्साहन की भूमिका को वैज्ञानिक रूप से रेखांकित किया था।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- प्रेरणा के सिद्धांत दो प्रकार के होते हैं- आंतरिक (Intrinsic) और बाह्य (Extrinsic)। प्रोत्साहन सिद्धांत मुख्य रूप से बाह्य कारकों पर जोर देता है।
- स्पीयरमैन (विकल्प a) ने बुद्धि के 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) का प्रतिपादन किया था।
- विलियम स्टर्न (विकल्प b) ने 'मानसिक आयु' (Mental Age) शब्द का प्रतिपादन किया था।
- अब्राहम मास्लो (विकल्प d) ने 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) का प्रतिपादन किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में प्रेरणा (Motivation) विद्यार्थी के अधिगम का सर्वोत्कृष्ट राजमार्ग है। बोल्स और काफमैन द्वारा प्रतिपादित प्रोत्साहन सिद्धांत यह सिखाता है कि किस प्रकार सकारात्मक पुनर्बलन और बाहरी प्रोत्साहन कक्षा कक्ष में छात्रों की सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें अधिगम प्रेरणा के सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET) में प्रेरणा से जुड़े सिद्धांतों से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम और बोल्स व काफमैन का प्रोत्साहन सिद्धांत दोनों ही प्रेरणा के क्षेत्र में मील का पत्थर हैं। परीक्षा कक्ष में यदि प्रश्न प्रोत्साहन सिद्धांत (Incentive Theory) से संबंधित हो, तो सही उत्तर बोल्स व काफमैन होगा। इसके अलावा, अध्यापकों को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के दौरान छात्रों में आंतरिक अभिप्रेरणा के साथ-साथ बाह्य प्रोत्साहनों का भी उचित संतुलन बनाना चाहिए ताकि उनका समग्र संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास सुनिश्चित किया जा सके।