बुद्धि का 'पदानुक्रमित सिद्धांत' (Hierarchical Theory) किसने दिया था?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि का 'पदानुक्रमित सिद्धांत' (Hierarchical Theory of Intelligence) मनोवैज्ञानिक फिलिप वर्नन (Philip Vernon) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, बुद्धि को विभिन्न स्तरों या पदानुक्रम (Hierarchy) में व्यवस्थित किया जाता है, जो स्पीयरमैन के द्व-कारक सिद्धांत (Two-Factor Theory) और बर्ट के विचारों का एक बेहतरीन समन्वय प्रस्तुत करता है। वर्नन के मॉडल में सबसे ऊपर 'सामान्य बुद्धि' (General Intelligence या 'g' factor) होती है, जिसके नीचे प्रमुख समूह कारक (Major Group Factors) जैसे मौखिक-शैक्षणिक (Verbal-Educational) और व्यावहारिक-यांत्रिक (Practical-Mechanical) कारक आते हैं। इसके बाद छोटे समूह कारक और अंत में विशिष्ट कारक (Specific factors या 's' factors) शामिल होते हैं। यह दृष्टिकोण बाल विकास में संज्ञानात्मक क्षमताओं की बहु-स्तरीय संरचना को समझने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- फिलिप वर्नन का पदानुक्रमित मॉडल बुद्धि के सामान्य कारक ('g') और विशिष्ट कारकों ('s') के बीच एक मध्यस्थ सेतु का कार्य करता है।
- विकल्प (b) हावर्ड गार्डनर ने 'बहुबुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) दिया था, जिसमें 8 प्रकार की स्वतंत्र बुद्धियों का वर्णन है।
- विकल्प (c) स्पीयरमैन ने बुद्धि का 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) दिया था, जिसमें 'g' और 's' कारक शामिल हैं।
- विकल्प (d) कैथरीन कुक इस संदर्भ में प्रासंगिक मनोवैज्ञानिक नहीं हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में बुद्धि के विभिन्न सिद्धांत बच्चों की मानसिक योग्यताओं के मूल्यांकन का आधार बनते हैं। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें बुद्धि के सिद्धांत और मानसिक विकास।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में बुद्धि के सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न अक्सर सीधे तथ्यात्मक या मिलान वाले प्रारूप में पूछे जाते हैं। वर्नन का पदानुक्रमित सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि बच्चों की बुद्धिमत्ता को केवल एक 'g' कारक तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह विभिन्न स्तरों पर फैली होती है। शिक्षकों के लिए यह समझना आवश्यक है कि कक्षा में प्रत्येक छात्र की मौखिक और व्यावहारिक क्षमताएं अलग-अलग स्तर पर पदानुक्रमित रूप से विकसित हो सकती हैं, जिसके आधार पर विभेदित शिक्षण (Differentiated Instruction) रणनीतियों का उपयोग किया जाना चाहिए।