इनमें से कौन-सी वस्तुनिष्ठ नहीं है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शिक्षा मनोविज्ञान और मूल्यांकन (Evaluation in Education) के अंतर्गत वस्तुनिष्ठ (Objective) परीक्षण वे होते हैं जिनमें मूल्यांकनकर्ता का व्यक्तिगत पूर्वाग्रह (Personal Bias) उत्तर को प्रभावित नहीं करता है और प्रत्येक प्रश्न का एक निश्चित व एकमात्र सही उत्तर होता है। 'बहुविकल्पी' (Multiple choice), 'सत्य-असत्य' (True-false) और 'सादृश्य' (Analogy) प्रकार के प्रश्न वस्तुनिष्ठ परीक्षण के अंतर्गत आते हैं क्योंकि इनमें अंकों की निष्पक्षता बनी रहती है। इसके विपरीत, 'समझ' (Comprehension) या रचनात्मक उत्तर लेखन, निबंधात्मक परीक्षण (Subjective Assessment) का एक हिस्सा होते हैं, जिसमें छात्र अपनी भाषा में विस्तृत उत्तर लिखते हैं। यहाँ परीक्षक की मानसिकता, लेखन शैली और दृष्टिकोण के अनुसार अंकों में भिन्नता आ सकती है, इसलिए समझ (Comprehension) आधारित परीक्षण पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ नहीं बल्कि व्यक्तिपरक (Subjective) या अर्द्ध-वस्तुनिष्ठ प्रकृति का होता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions): उच्च विश्वसनीयता (Reliability) और उच्च वैधता (Validity) वाले होते हैं।
- बहुविकल्पी और सत्य-असत्य प्रकार के प्रश्नों में अनुमान लगाने (Guessing) की संभावना होती है लेकिन मार्किंग पूरी तरह निष्पक्ष होती है।
- सादृश्य (Analogy) संबंध स्थापित करने की क्षमता का परीक्षण करता है और इसका भी एक पूर्वनिर्धारित सटीक उत्तर होता है।
- समझ (Comprehension) आधारित प्रश्न शिक्षार्थी की उच्च-स्तरीय चिंतन क्षमताओं (Higher-Order Thinking Skills) का आकलन करते हैं, जो व्यक्तिपरक मूल्यांकन की श्रेणी में आते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: मूल्यांकन और मापन के क्षेत्र में ब्लूम के वर्गीकरण और परीक्षा सुधारों के अनुसार, वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति को कम करना और निष्पक्षता लाना है, जबकि व्यक्तिपरक आकलन रचनात्मकता को परखता है। अधिक जानें: समावेशी शिक्षा एवं मूल्यांकन
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:ः
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में मूल्यांकन की तकनीकों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। जब हम मूल्यांकन के स्वरूप का अध्ययन करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों में अंकों की वस्तुनिष्ठता (Objectivity) के कारण मानवीय त्रुटि या पक्षपात की संभावना शून्य हो जाती है। बहुविकल्पी, सत्य-असत्य और सादृश्य ऐसे प्रारूप हैं जहाँ उत्तर या तो पूरी तरह सही होता है या गलत। दूसरी ओर, 'Comprehension' (समझ) गद्यांश या पद्यांश पर आधारित ऐसे प्रश्न होते हैं जहाँ छात्र अपने शब्दों में उत्तर देते हैं, और परीक्षार्थी के मूल्यांकन में वैचारिक भिन्नता आ सकती है। अतः यह विकल्प वस्तुनिष्ठ की श्रेणी से बाहर माना जाता है। भावी शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि एक आदर्श मूल्यांकन प्रणाली में वस्तुनिष्ठ और व्यक्तिपरक दोनों प्रकार के परीक्षणों का संतुलित उपयोग होना चाहिए ताकि छात्र के ज्ञानात्मक और सृजनात्मक दोनों पक्षों का सटीक आकलन किया जा सके।