राष्ट्रीय शिक्षा आयोग (1964-66) को किस नाम से जाना जाता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
राष्ट्रीय शिक्षा आयोग (1964-66) को लोकप्रिय रूप से 'कोठari आयोग' (Kothari Commission) के नाम से जाना जाता है। इस आयोग का गठन 14 जुलाई 1964 को दौलत सिंह कोठari (डी.एस. कोठari) की अध्यक्षता में किया गया था, जो उस समय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष थे। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य भारत के सभी स्तरों और पहलुओं पर शिक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करना और राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के विकास के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना था। इसने 'शिक्षा और राष्ट्रीय विकास' (Education and National Development) शीर्षक से अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसने स्वतंत्र भारत की शिक्षा नीति (1968) की नींव रखी। अतः विकल्प (c) बिल्कुल सही है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कोठारी आयोग (1964-66): इसे बहु-आयामों पर आधारित पहला भारतीय शिक्षा आयोग कहा जाता है जिसने सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा को माध्यम माना।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948-49) डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित हुआ था, जो उच्च शिक्षा से संबंधित था।
- विकल्प (b) का विश्लेषण: राष्ट्रीय ज्ञान आयोग (National Knowledge Commission) की स्थापना वर्ष 2005 में सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में हुई थी।
- विकल्प (d) का विश्लेषण: माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952-53) को 'मुदलियार आयोग' के नाम से जाना जाता है, जो माध्यमिक शिक्षा के पुनर्गठन से जुड़ा था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: भारतीय शिक्षा आयोग (1964-66) ने देश में 10+2+3 शिक्षा ढांचे की सिफारिश की थी और कुल जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा था। इस प्रकार की शैक्षिक नीतियों का विस्तृत अध्ययन समावेशी शिक्षा और नीतिगत विकास के अंतर्गत किया जाता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, और State TETs) में भारतीय शिक्षा आयोगों और उनके अध्यक्षों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों को राधाकृष्णन आयोग (1948), मुदलियार आयोग (1952), और कोठारी आयोग (1964) के कालक्रम और उनके प्रमुख सुझावों के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। कोठारी आयोग ने त्रि-भाषा सूत्र (Three-Language Formula) की भी जोरदार वकालत की थी, जो भाषा शिक्षण शास्त्र (Pedagogy of Language) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोग की यह रिपोर्ट भारतीय शिक्षा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई।