किस मनोवैज्ञानिक का मानना था कि बच्चे क्रियाप्रसूत अनुकूलन के माध्यम से भाषा सीखते हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
इस प्रश्न का सही उत्तर बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) है। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक बी.एफ. स्किनर का यह दृढ़ विश्वास था कि बच्चे भाषा को जन्मजात क्षमताओं या नियमों से नहीं, बल्कि अन्य सामान्य व्यवहारों की तरह ही 'क्रियाप्रसूत अनुकूलन' (Operant Conditioning) या पुनर्बलन (Reinforcement) के माध्यम से सीखते हैं। स्किनर के अनुसार, जब एक शिशु या बालक प्रारंभिक अवस्था में कोई सार्थक या अनुकरण आधारित ध्वनि निकालता है, तो माता-पिता या पर्यावरण द्वारा उसे सराहना, मुस्कान या पुरस्कार (सकारात्मक पुनर्बलन) दिया जाता है। इस बार-बार मिलने वाले सकारात्मक पुनर्बलन से बालक उन ध्वनियों या शब्दों को बार-बार दोहराता है और धीरे-धीरे भाषा सीख जाता है। इसके विपरीत, गलत या अमूर्त ध्वनियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे वे विलुप्त हो जाती हैं। यह सिद्धांत व्यवहारवादी दृष्टिकोण (Behaviorist Approach) पर आधारित है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- स्किनर (Skinner): भाषा अर्جن व्यवहारवाद पर आधारित है, जहाँ अनुकरण (Imitation) और पुनर्बलन (Reinforcement) मुख्य भूमिका निभाते हैं।
- चॉम्स्की (Chomsky): इन्होंने स्किनर के सिद्धांत का खंडन किया और कहा कि बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है, जिसे 'भाषा अर्जन उपकरण' (LAD - Language Acquisition Device) कहा जाता है।
- वाइगोत्स्की (Vygotsky): इनके अनुसार भाषा सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction) और सांस्कृतिक उपकरणों का परिणाम है, जो पहले सामाजिक भाषण और फिर आंतरिक भाषण बनती है।
- प्याजे (Piaget): प्याजे का मानना था कि भाषा बच्चे के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) से उत्पन्न होती है और पहले अहंकेन्द्रित वाचन होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास में भाषा विकास के विभिन्न आयामों को समझने के लिए भाषा विकास का सिद्धांत पढ़ना अनिवार्य है, जिसमें स्किनर का व्यवहारवाद और चॉम्स्की का जन्मजात सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB) में भाषा विकास से जुड़े सिद्धांतों पर बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन को समझने के लिए यह याद रखना जरूरी है कि व्यवहारवादियों का मानना था कि भाषा एक 'आदत' (Habit formation) है जो उद्दीपन-अनुक्रिया (Stimulus-Response) के जरिए मजबूत होती है। हालांकि, नोम चॉम्स्की ने इस बात की कड़ी आलोचना की कि बच्चे केवल अनुकरण से इतनी जटिल व्याकरणिक संरचनाएं नहीं सीख सकते। परीक्षा कक्ष में विकल्पों का चयन करते समय ध्यान रखें कि जब भी 'पुनर्बलन' और 'अनुकूलन' शब्दों का प्रयोग हो, तो उत्तर हमेशा बी.एफ. स्किनर ही होगा।