निम्नलिखित में से किस राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समाजोपयोगी उत्पादक कार्य की अवधारणा को पेश किया गया था?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
समाजोपयोगी उत्पादक कार्य (Socially Useful Productive Work - SUPW) की अवधारणा को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 (NEP 1986) तथा उससे पूर्व ईश्वरभाई पटेल समिति (1977) की संस्तुतियों के आधार पर शिक्षा प्रणाली में एकीकृत किया गया था। इस अवधारणा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना, उन्हें समुदाय से जोड़ना और सैद्धांतिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक जीवनोपयोगी कौशलों से लैस करना था। यह व्यावसायिक शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का एक माध्यम था, जिससे छात्र आत्मनिर्भर बन सकें।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- ईश्वरभाई पटेल समिति (1977) ने पहली बार विद्यालयी शिक्षा में 'सामाजिक रूप से उपयोगी उत्पादक कार्य' (SUPW) शब्द को गढ़ा था, जिसे बाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 द्वारा बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया।
- विकल्प (b) 'NEP 2005' कोई नीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) है, जो ज्ञान को बाहरी जीवन से जोड़ने पर बल देती है।
- विकल्प (c) 'NEP 2000' नाम से कोई आधिकारिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति नहीं आई है।
- विकल्प (d) 'कोठारी आयोग (1964-66)' ने शिक्षा और राष्ट्रीय विकास के बीच संबंध स्थापित किया और कार्य-अनुभव (Work Experience) को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने की बात कही, लेकिन 'SUPW' का विशिष्ट पदनाम बाद के दशकों में अधिक परिष्कृत हुआ।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: भारतीय शिक्षा आयोगों और नीतियों के इतिहास में व्यावसायिक शिक्षा और उत्पादक कार्यों का समावेश महात्मा गांधी की 'बुनियादी शिक्षा' (Wardha Scheme) की विचारधारा पर आधारित है। इसे गहराई से समझने के लिए समावेशी शिक्षा और नीतिगत विकास के अध्यायों का अध्ययन किया जाता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, राज्य TET) में अक्सर भारतीय शिक्षा के इतिहास, विभिन्न आयोगों और नीतियों जैसे कोठारी आयोग, एनईपी 1986, और एनसीएफ 2005 से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। SUPW का उद्देश्य केवल हस्तकला सिखाना नहीं था, बल्कि बच्चों के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और मनोगतत्मक (Psychomotor) डोमेन का समग्र विकास करना था। यह ब्लूम के वर्गीकरण के व्यावहारिक क्रियान्वयन से भी जुड़ा है। परीक्षार्थियों को विभिन्न शिक्षा नीतियों के मुख्य संस्तुति वर्षों और उनके मुख्य उद्देश्यों को याद रखना चाहिए ताकि ऐसे तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सके।