बुद्धि का 'बहु-कारक सिद्धांत' (Multi-factor Theory) में ई.एल. थॉर्नडाइक ने बुद्धि को किस प्रकार का माना है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि के बहु-कारक सिद्धांत (Multi-factor Theory of Intelligence) के प्रतिपादक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ई.एल. थॉर्नडाइक (E.L. Thorndike) हैं। इस सिद्धांत के अनुसार, बुद्धि किसी एक या दो योग्यताओं का परिणाम नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र और अलग-अलग मानसिक योग्यताओं या कारकों (Factors) का एक समूह या समुच्चय है। थॉर्नडाइक ने बुद्धि का कोई सामान्य कारक नहीं माना, बल्कि उनका मानना था कि प्रत्येक मानसिक क्रिया में स्वतंत्र कारकों का एक विशेष संयोजन कार्य करता है। उन्होंने बुद्धि को 'बालू के ढेर' (Sand Heap Theory) के रूप में भी उपमित किया, जहाँ हर एक कण एक स्वतंत्र मानसिक योग्यता को दर्शाता है। इस प्रकार, विकल्प (b) सही है क्योंकि यह अनेक स्वतंत्र कारकों के समूह को रेखांकित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- थॉर्नडाइक का दृष्टिकोण: बुद्धि स्वतंत्र तत्वों या इकाइयों का मिश्रण है जो विभिन्न प्रकार की समस्याओं को हल करने में मदद करती है।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: एकल कारक सिद्धांत विने, टरमन और स्टर्न द्वारा समर्थित था, जो थॉर्नडाइक के बहु-कारक के विपरीत है।
- विकल्प (c) का विश्लेषण: द्वि-कारक सिद्धांत (Two-factor Theory) चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) द्वारा प्रतिपादित किया गया था जिसमें 'G' और 'S' कारक शामिल हैं।
- अन्य नाम: थॉर्नडाइक के इस सिद्धांत को 'परमाणुवादी सिद्धांत' (Atomistic Theory of Intelligence) के नाम से भी जाना जाता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में बुद्धि के स्वरूप को समझने के लिए थॉर्नडाइक का बहु-कारक सिद्धांत एक मील का पत्थर है। यह बाल-केन्द्रित शिक्षा और वैयक्तिक भिन्नताओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत और थॉर्नडाइक के अधिगम सिद्धांत के लेखों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, सुपरटेट) में बुद्धि के विभिन्न सिद्धांतों और उनके प्रतिपादकों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। थॉर्नडाइक के बहु-कारक सिद्धांत को बालू के ढेर का सिद्धांत भी कहा जाता है, जो यह स्पष्ट करता है कि प्रत्येक बालक में विभिन्न प्रकार की बौद्धिक क्षमताएं स्वतंत्र रूप से मौजूद होती हैं। कक्षा शिक्षण के दौरान एक शिक्षक को यह समझना आवश्यक है कि कोई भी बच्चा हर क्षेत्र में समान रूप से कुशल नहीं हो सकता, क्योंकि उसकी बौद्धिक क्षमताएं स्वतंत्र कारकों का समुच्चय होती हैं। ऐसे वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को हल करते समय स्पीयरमैन के द्वि-कारक और थॉर्नडाइक के बहु-कारक सिद्धांत के बीच का मुख्य अंतर याद रखना चाहिए।