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थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि
Asked 3 महीने पहले · Viewed 1,735 times
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अधिगम के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error) में 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) किसने विकसित किया?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

अधिगम के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के प्रतिपादक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ई.एल. थॉर्नडाइक (E.L. Thorndike) हैं। उन्होंने अपने इस प्रसिद्ध सिद्धांत के अंतर्गत सीखने के तीन मुख्य नियम और पाँच गौण नियम प्रतिपादित किए थे। इन्हीं मुख्य नियमों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) है। इस नियम के अनुसार, जिस कार्य या प्रतिक्रिया का परिणाम संतोषजनक, सुखद या सकारात्मक होता है, उस व्यवहार को प्राणी बार-बार दोहराता है और वह स्थाई हो जाता है; इसके विपरीत, यदि परिणाम असंतोषजनक या कष्टदायक होता है, तो वह व्यवहार धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। इस प्रकार थॉर्नडाइक का यह नियम पुरस्कार और दंड (Reward and Punishment) की अवधारणा पर आधारित है जो कक्षा शिक्षण में प्रेरणा (Motivation) और पुनर्बलन (Reinforcement) के लिए आधारशिला प्रदान करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • थॉर्नडाइक के सीखने के तीन मुख्य नियम हैं: तत्परता का नियम (Law of Readiness), अभ्यास का नियम (Law of Exercise), और प्रभाव का नियम (Law of Effect)।
  • विकल्प (a) पावलोव ने 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning) दिया; विकल्प (b) स्किनर ने 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) दिया; और विकल्प (d) कोहलर ने 'सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' (Insight Learning Theory) प्रतिपादित किया है।
  • थॉर्नडाइक ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'एजुकेशन साइकोलॉजी' में पशुओं (विशेषकर भूखी बिल्ली) पर प्रयोग करके इस सिद्धांत को सिद्ध किया था।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: थॉर्नडाइक का प्रभाव का नियम व्यवहारवाद (Behaviorism) की नींव का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है जो यह स्पष्ट करता है कि उद्दीपक और प्रतिक्रिया (S-R Bond) के बीच संबंध को मजबूत करने में संतोषजनक परिणाम की क्या भूमिका होती है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम के सिद्धांत और शिक्षण मनोविज्ञान के अध्यायों का अध्ययन करें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, STET) में थॉर्नडाइक के नियमों से संबंधित प्रश्न प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बार-बार पूछे जाते हैं। 'प्रभाव का नियम' को 'संतोष और असंतोष का नियम' भी कहा जाता है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में बच्चों की रुचि, पुरस्कार, प्रशंसा और सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) इसी नियम पर आधारित हैं। यदि शिक्षक कक्षा कक्ष में छात्रों के सही उत्तरों पर उनकी प्रशंसा करते हैं या उन्हें पुरस्कृत करते हैं, तो बच्चे उस विषय वस्तु को अधिक तेजी से और स्थाई रूप से सीखते हैं। यह सिद्धांत विशेष रूप से धीमी गति से सीखने वाले बालकों (Slow Learners) और प्राथमिक स्तर के शिक्षण के लिए अत्यधिक उपयोगी है क्योंकि इसमें बार-बार अभ्यास और संतोषजनक परिणामों द्वारा आदतों का निर्माण किया जाता है।

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→ एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद और प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism and Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी अनुक्रिया (Response) के बाद यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम (Satisfying State of Affairs) प्राप्त होता है, तो उस उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया के बीच का तंत्रिकाकीय संबंध मजबूत हो जाता है, तथा यदि असंतोषजनक या कष्टप्रद परिणाम प्राप्त होता है, तो वह बंधन कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, संतोषजनक अनुभवों और प्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत में 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) मुख्य रूप से किससे संबंधित है? → एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)—जिसके तहत यह स्पष्ट किया जाता है कि जब कोई स्नायु तंत्र (Nervous System) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो उसे संतोष मिलता है तथा जब वह तैयार नहीं होता और उसे जबरन कार्य कराया जाता है, तो उसे झुंझलाहट या असंतोष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, शैक्षणिक तत्परता और अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → अधिगम के मनोविज्ञान के अंतर्गत एडवर्ड थार्नडाइक के 'मुख्य नियमों' (Primary Laws of Learning) तथा बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) के सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) के संप्रत्यय का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, थार्नडाइक के किस विशिष्ट नियम का प्रत्यक्ष वैचारिक विस्तार और प्रायोगिक परिमार्जन आगे चलकर स्किनर के 'पुनर्बलन अनुसूची' (Schedules of Reinforcement) और अनुक्रिया-प्रतिक्रिया गतिकी का आधार बना? → अधिगम के 'प्रयास एवं त्रुटि' (Trial and Error) सिद्धांत में 'थॉर्नडाइक' ने कौन सा मुख्य नियम नहीं दिया था? → प्रयास एवं त्रुटि (Trial and Error) सिद्धांत के प्रतिपादक कौन हैं? → अधिगम के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error) में 'अभ्यास का नियम' (Law of Exercise) क्या बताता है? → बुद्धि का 'बहु-कारक सिद्धांत' (Multi-factor Theory) में ई.एल. थॉर्नडाइक ने बुद्धि को किस प्रकार का माना है?
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