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किस रियासत के विलय को 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' ने नामंजूर कर दिया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
करौली रियासत के विलय के निर्णय को लंदन में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने रद्द कर दिया था।
Related Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) गुप्त काल के दौरान 'भूमि अनुदान' (अग्रहार) की प्रथा में अत्यधिक वृद्धि हुई। (2) इस काल में 'सामंतवाद' के उदय के स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) और उनके वायुमंडलीय प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जेट स्ट्रीम क्षोभमंडल (Troposphere) के ऊपरी हिस्से में तीव्र गति से बहने वाली संकीर्ण हवाओं की नदियाँ हैं, और ध्रुवीय वाताग्र जेट स्ट्रीम (Polar Front Jet Stream) मुख्य रूप से ठंडी ध्रुवीय हवाओं और गर्म उष्णकटिबंधीय हवाओं के बीच तापमान के अत्यधिक अंतर के कारण उत्पन्न होती है।
2. भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून के आगमन और उसके वितरण में 'उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Tropical Easterly Jet Stream) की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो गर्मियों के दौरान तिब्बती पठार के गर्म होने से उत्पन्न होकर प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर से पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है।
3. रॉस्बी तरंगें (Rossby Waves) लंबी वायुमंडलीय तरंगें होती हैं जो जेट स्ट्रीम के मार्ग में क्षैतिज रूप से घुमावदार पैटर्न बनाती हैं, और इन तरंगों के अत्यधिक विस्थापन से मौसम की स्थिति में लंबे समय तक अवरोध उत्पन्न हो सकता है, जिससे गंभीर सूखे या अत्यधिक बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन प्रक्रिया और इससे संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की शक्ति केवल संसद को प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य होता है।
2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन, संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार, या सातवीं अनुसूची की सूचियाँ) में संशोधन करने के लिए न केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) से पारित होना आवश्यक है, बल्कि कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उनका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है।
3. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, यहाँ तक कि वह संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) में भी परिवर्तन या संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह विशेष बहुमत से पारित हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India - ECI) की संरचना, नियुक्ति, सेवा शर्तें तथा इससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324(2) के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में मूल रूप से यह प्रावधान किया गया था कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय होगा जिसमें राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित संख्या में अन्य आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं।
2. 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023)' मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक उच्च-स्तरीय चयन समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी, जब तक कि इस विषय पर संसद कोई नया कानून नहीं बना लेती।
3. 'टी. एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार वही होंगे जो उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश के लिए महाभियोग (Impeachment) के माध्यम से निर्धारित हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन प्रक्रिया और इससे संबंधित न्यायिक सिद्धांतों (Judicial Doctrines) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान का संशोधन केवल संसद के किसी भी सदन में इस प्रयोजन के लिए विधेयक पेश करके ही किया जा सकता है, और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति (Prior Recommendation) लेना अनिवार्य होता है।
2. ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संशोधन 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
3. संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 368 में खंड (4) और खंड (5) जोड़े गए थे, जिनके माध्यम से यह प्रावधान किया गया था कि संसद द्वारा पारित किसी भी संविधान संशोधन को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, किंतु 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इन खंडों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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