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विकास के क्षेत्र सभी देखें (969) शारीरिक एवं गामक विकास3 संज्ञानात्मक विकास429 सामाजिक विकास21 संवेगात्मक विकास109 भाषा विकास23 नैतिक एवं चारित्रिक विकास384
विकास के प्रमुख सिद्धांतकार सभी देखें (1928) जीन पियाजे519 लेव वाइगोत्स्की403 लॉरेंस कोहलबर्ग19 एरिक एरिक्सन37 जेरोम ब्रूनर76 अल्बर्ट बंडूरा134 सिगमंड फ्रायड278 मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद406 अन्य सिद्धांतकार (गेसेल, ब्रोनफेनब्रेनर, हॉल, आदि)56
अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
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वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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शिक्षण में 'सूक्ष्म शिक्षण' (Micro Teaching) का मुख्य चरण क्या है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

शिक्षण में 'सूक्ष्म शिक्षण' (Micro Teaching) एक ऐसी तकनीक है जिसका विकास डी.डब्ल्यू. एलन (D.W. Allen) ने 1963 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया था। यह शिक्षक प्रशिक्षण की एक वास्तविक और प्रायोगिक विधि है, जिसमें भावी शिक्षकों के जटिल शिक्षण कौशल को सरल और छोटे भागों में विभाजित करके अभ्यास कराया जाता है। सूक्ष्म शिक्षण का मुख्य चक्र (Micro Teaching Cycle) कुल 36 मिनट का होता है, जिसमें योजना बनाना (Plan), शिक्षण करना (Teach), पृष्ठपोषण या प्रतिपुष्टि प्राप्त करना (Feedback), पुनः योजना बनाना (Re-plan), पुनः शिक्षण करना (Re-teach), और पुनः पृष्ठपोषण (Re-feedback) शामिल हैं। विकल्प (a) इस पूर्ण और क्रमिक चक्र को बिल्कुल सटीक रूप से प्रदर्शित करता है, इसलिए यह सही उत्तर है। अन्य विकल्प सूक्ष्म शिक्षण की इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का खंडन करते हैं और केवल औपचारिकता मात्र हैं।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • सूक्ष्म शिक्षण के जनक डी.डब्ल्यू. एलन माने जाते हैं, जबकि भारत में इसका प्रसार पासी (B.K. Passi) और आर.एन. मल्होत्रा द्वारा किया गया।
  • भारतीय संदर्भ में सूक्ष्म शिक्षण चक्र की कुल अवधि सामान्यतः 36 मिनट की होती है (शिक्षण: 6 मिनट, प्रतिपुष्टि: 6 मिनट, पुनः योजना: 12 मिनट, पुनः शिक्षण: 6 मिनट, पुनः प्रतिपुष्टि: 6 मिनट)।
  • विकल्प (b), (c) और (d) क्रमशः आंशिक या अप्रासंगिक शिक्षण विधियों को दर्शाते हैं जो सूक्ष्म शिक्षण के वृहद और वैज्ञानिक स्वरूप को परिभाषित नहीं करते।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: सूक्ष्म शिक्षण शिक्षक प्रशिक्षण का एक प्रभावी समावेशी शिक्षा एवं कौशल विकास उपकरण है जो कक्षा कक्ष की जटिलताओं को कम करता है।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में सूक्ष्म शिक्षण के चरणों के क्रम और समय-सीमा पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। छात्रों को याद रखना चाहिए कि यह तकनीक छात्र-अध्यापकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उनमें विशिष्ट शिक्षण कौशलों (जैसे- श्यामपट्ट कौशल, प्रश्न पूछने का कौशल, दृष्टांत कौशल आदि) को निखारने का कार्य करती है। यहाँ 'पुनः' (Re) शब्दों का प्रयोग शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए किया जाता है।

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अगला प्रश्न → शिक्षण में 'आगमन विधि' (Inductive Method) का प्रयोग मुख्य रूप से कब किया जाता… ← पिछला प्रश्न शिक्षण में 'सूक्ष्म शिक्षण' (Micro Teaching) का उपयोग…

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