नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दूसरे चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की सबसे विशिष्ट एवं वैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के दृष्टिकोण से लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोहलबर्ग के सिद्धांत के तीन मुख्य स्तर हैं: पूर्व-रूढ़िगत स्तर, रूढ़िगत स्तर और उत्तर-रूढ़िगत स्तर। उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) का छठा और अंतिम चरण 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) है। इस चरण में व्यक्ति बाहरी सामाजिक दबावों, कानूनों या परंपराओं से परे जाकर अपने स्वयं के विवेक और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे मानवाधिकार, मानवीय गरिमा और समानता) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है। यदि कोई स्थापित कानून इन सार्वभौमिक सिद्धांतों के विरुद्ध जाता है, तो इस स्तर पर व्यक्ति उस कानून को तोड़ने का नैतिक साहस भी रखता है। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा का सबसे सटीक वैज्ञानिक वर्णन करता है।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए मनोवैज्ञानिक कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग का प्रतिमान पुरुषों के न्याय-उन्मुख (Justice-oriented) दृष्टिकोण पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और जिम्मेदारी' (Care and Responsibility) के संदर्भात्मक और संबंधात्मक दृष्टिकोण पर आधारित होता है। गिलिगन के इस नारीवादी और विकासात्मक परिप्रेक्ष्य के अनुसार, महिलाओं के नैतिक तर्क का सर्वोच्च और परिपक्वतम स्तर कोहलबर्ग के किस स्तर या वैचारिक प्रतिमान से सीधे तौर पर भिन्नता रखता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-Conventional Level) के द्वितीय चरण—'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation)—की दार्शनिक और तात्विक गहराई का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस चरण में व्यक्ति के नैतिक निर्णय और न्याय की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अनुसार, पारंपरिक नैतिकता के स्तर (Conventional Level) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण यानी 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) की सबसे प्रमुख और विशिष्ट विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के चरम चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून के अंधे अनुपालन के बजाय अपने स्वयं के अंतःकरण, सार्वभौमिक मानवाधिकारों, न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के आंतरिक रूप से चयनित स्व-निर्धारित नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही और गलत का निर्णय करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक नैतिक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वायत्त निर्णय-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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'नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality) की अंतिम अवस्था—'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—के वैज्ञानिक स्वरूप और उसकी मुख्य विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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'नैतिक विकास के सिद्धांत' के संदर्भ में, लॉरेन्स कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित नैतिक विकास के तीन स्तरों और उनके छह चरणों के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Level) के दो महत्वपूर्ण चरणों—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles)—के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप तथा कैरोल गिलीगन (Carol Gilligan) द्वारा कोहलबर्ग के सिद्धांत की की गई आलोचना (जिसमें उन्होंने 'देखभाल की नैतिकता' या 'इथिक्स ऑफ केयर' का प्रतिपादन किया) के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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'लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, कोहलबर्ग द्वारा बताए गए तीन स्तरों और उनके अंतर्गत छह चरणों में से उस विशिष्ट चरण को पहचानिए जो 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-conventional Morality) के स्तर के अंतर्गत आता है, जिसमें व्यक्ति कानून और सामाजिक व्यवस्था से ऊपर उठकर अपने स्वयं के विवेक, सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों और मानवीय अधिकारों (जैसे न्याय, समानता और आपसी सम्मान) के आधार पर सही या गलत का निर्णय करता है, भले ही वे नियम समाज या कानून के विपरीत क्यों न हों?
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'बाल विकास और शिक्षण अधिगम प्रक्रिया' के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की पारंपरिक स्तर (Conventional Level) के अंतर्गत आने वाली चौथी अवस्था यानी 'कानून एवं व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) की सबसे मुख्य और निर्णायक मनोवैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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