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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के संदर्भ में, विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) तथा 'निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act 2009) के प्रावधानों के तहत कक्षा-कक्षीय प्रबंधन में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) और 'सार्वभौमिक रूप से अभिकल्पित अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के वैज्ञानिक स्वरूप एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

सार्वभौमिक रूप से अभिकल्पित अधिगम (UDL) एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो सभी छात्रों को सीखने के समान अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके तीन मुख्य सिद्धांत हैं: प्रतिनिधित्व के बहुविध साधन (What to learn), अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (How to learn), और जुड़ाव के बहुविध साधन (Why to learn)। यह दृष्टिकोण कक्षा में मौजूद विविधता को स्वीकार करते हुए अधिगम की बाधाओं को न्यूनतम करता है। अतः विकल्प (b) पूर्णतः सत्य और वैज्ञानिक है। अन्य विकल्प तथ्यात्मक रूप से गलत हैं क्योंकि RTE Act 2009 और NCF 2005 समावेशी शिक्षा के तहत सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों की एकसाथ शिक्षा पर बल देते हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा अर्जन और संज्ञानात्मक विकास के बीच अंतर्संबंधों' के संदर्भ में, नोम चोमस्की (Noom Chomsky) द्वारा प्रतिपादित 'भाषा अर्जन यंत्र' (Language Acquisition Device - LAD) और 'सार्वभौमिक व्याकरण' (Universal Grammar) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area) और 'वेर्निके क्षेत्र' (Wernicke's Area) की आनुवंशिक रूप से निर्धारित वाक्य-संरचनात्मक सक्रियण प्रक्रिया, तथा बेंजामिन ली व्होर्फ़ (Benjamin Lee Whorf) और एडवर्ड सेपिर (Edward Sapir) द्वारा प्रतिपादित 'भाषिक सापेक्षता परिकल्पना' (Linguistic Relativity Hypothesis / Sapir-Whorf Hypothesis) के अंतर्गत 'भाषा विचारों को निर्धारित करती है' के सशक्त संस्करण के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुभाषी वातावरण (Multilingual Classroom) के प्रबंधन और विद्यार्थियों में स्वदेशी भाषा संप्रेषण एवं संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के बहुआयामी सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल और पैरिएटल लोब्स' (विशेष रूप से स्थानिक और शारीरिक-गतिक बुद्धिमत्ता के लिए), 'टेम्पोरल लोब और ब्रोका-वर्निक क्षेत्र' (भाषाई और संगीतात्मक बुद्धिमत्ता के लिए), तथा 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (इंट्रापर्सनल और इंटरपर्सनल बुद्धिमत्ता के लिए) के बीच विशिष्ट डोमेन-विशिष्ट तंत्रिका नेटवर्क (Modular Neural Networks) की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'त्रितंत्र बुद्धि सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence: विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित रचनावादी शिक्षाशास्त्र (Differentiated Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुविध क्षमताओं, व्यावहारिक अनुकूलन व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की विधियाँ और शिक्षण प्रविधियाँ' के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) द्वारा प्रतिपादित 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) सिद्धांत पर आधारित 'अभिक्रमित अनुदेशन' (Programmed Instruction) के अंतर्गत, नॉर्मन ए. क्राउडर (Norman A. Crowder) द्वारा विकसित 'शाखित अभिक्रमित अनुदेशन' (Branched Programmed Instruction या Intrinsic Programming) की सबसे विशिष्ट और केंद्रीय तकनीकी विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है? प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, न्याय दर्शन और उसके प्रणेता महर्षि गौतम द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्याय दर्शन एक यथार्थवादी (Realistic) और विश्लेषणात्मक दर्शन है, जिसके प्रवर्तक महर्षि गौतम (अक्षपाद) हैं, और इसका मुख्य उद्देश्य तर्क और प्रमाण के माध्यम से 'मोक्ष' (दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति) प्राप्त करना है। 2. इस दर्शन में ज्ञान प्राप्ति के लिए चार प्रमाण स्वीकार किए गए हैं: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द (आप्तोपदेश)। 3. न्याय दर्शन के अनुसार, ईश्वर संसार का रचयिता नहीं है बल्कि वह केवल इस ब्रह्मांड का एक निमित्त कारण (Efficient Cause) है, जो पूर्व-निर्मित परमाणुओं से सृष्टि का संचालन करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता (Creativity)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (1. तैयारी / Preparation, 2. उद्भवन / Incubation, 3. प्रदीप्ति या आहा! अनुभव / Illumination, और 4. सत्यापन / Verification) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एंटिरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC), और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच अचेतन सूचना पुनर्गठन (Unconscious Information Reorganization), संज्ञानात्मक नियंत्रण विश्राम, और नए विचारों के मूल्यांकन की सक्रियण गतिकी, तथा जोइ गिलफोर्ड (Joy Paul Guilford) के 'अपसारी चिंतन' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में समस्या-समाधान की मौलिकता, लीक से हटकर सोचने की क्षमता व समग्र संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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