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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की शैलियों और संज्ञानात्मक रणनीतियों' के संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत चार प्रमुख अधिगम शैलियों—'अभिसारी' (Converging), 'अपसारी' (Diverging), 'आत्मसातकर्ता' (Assimilating), और 'समायोजक' (Accommodating)—के न्यूरो-कॉग्निटिव और मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा एंथनी ग्रेगोरॉ (Anthony Gregorc) द्वारा प्रतिपादित 'मस्तिष्क-मन शैली मॉडल' (Gregorc Mind Styles Model) के अंतर्गत वर्णित धारणात्मक क्षमताओं (Concrete vs. Abstract) और आयोजन क्षमताओं (Random vs. Sequential) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक विभेदित शिक्षण (Differentiated Instruction) कक्षा-कक्ष प्रबंधन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड कोल्ब का प्रयोगात्मक अधिगम चक्र (Experiential Learning Cycle) और एंथनी ग्रेगोरॉ का माइंड स्टाइल मॉडल (Gregorc Mind Styles Model) दोनों ही शिक्षार्थियों की संज्ञानात्मक और अधिगम शैलियों (Learning Styles) को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोल्ब के अनुसार छात्र कंक्रीट अनुभव, रिफ्लेक्टिव ऑब्जरवेशन, एब्स्ट्रैक्ट कन्सेप्चुलाइजेशन और एक्टिव एक्सपेरिमेंटेशन के माध्यम से सीखते हैं, जिससे चार शैलियाँ (अभिसारी, अपसारी, आत्मसातकर्ता और समायोजक) बनती हैं। वहीं, ग्रेगोरॉ का मॉडल यह बताता है कि व्यक्ति कैसे जानकारी को ग्रहण करते हैं (मूर्त बनाम अमूर्त) और उसका आयोजन कैसे करते हैं (अनुक्रमिक बनाम यादृच्छिक)। इन दोनों के संयोजन से शिक्षक कक्षा में विभेदित निर्देश (Differentiated Instruction) और समावेशी शिक्षण विधियों का प्रभावी क्रियान्वयन कर सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व के शील गुण सिद्धांत' (Trait Theories of Personality) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक रेमंड कैटल (Raymond Cattell) द्वारा विकसित '16PF' (16 Personality Factor Questionnaire) तथा हंस आइजेंक (Hans Eysenck) के 'त्रि-आयामी शील गुण मॉडल' (Three-Factor Model / PEN Model: Psychoticism, Extraversion, Neuroticism) के वैज्ञानिक स्वरूप एवं उनके मापन पद्धति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'स्मृति और ज्ञान-निर्माण (Memory and Knowledge Construction)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, एरिक केंडेल (Eric Kandel) द्वारा समुद्री स्लग 'अपलीसिया' पर किए गए अभूतपूर्व प्रयोगों के आधार पर प्रतिपादित 'सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी और लॉन्ग-टर्म पोटेंशिएशन (LTP)' के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के 'सीए1 (CA1) और सीए3 (CA3) क्षेत्रों', 'एन-मिथाइल-डी-एस्पार्टेट (NMDA) रिसेप्टर्स' और 'कैल्शियम/कैमॉडुलिन-डिपेंडेंट प्रोटीन किनेज II (CaMKII)' के बीच आणविक संकेतन कैसकेड (Molecular Signaling Cascade), जीन ट्रांसक्रिप्शन और प्रोटीन संश्लेषण की सक्रियण गतिकी, तथा डोनाल्ड हेब (Donald Hebb) द्वारा प्रतिपादित 'हेब्बियन लर्निंग' ('Cells that fire together, wire together') के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सक्रिय रचनावादी शिक्षाशास्त्र (Active Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में दीर्घकालिक स्मृति समेकन (Long-term Memory Consolidation), तंत्रिका नेटवर्क सुदृढ़ीकरण व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) के दूसरे चरण यानी 'व्यक्तिवाद और विनिमय' (Individualism and Exchange) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से पुरस्कार प्राप्त करने और दंड से बचने की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर आधारित होता है, जिसे 'जैसी करनी वैसी भरनी' की भावना भी कहते हैं।
2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Interpersonal Relationships) अभिविन्यास में व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य दूसरों की नज़रों में aprobación (स्वीकृति) प्राप्त करना और सामाजिक रूप से स्वीकृत अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करना होता है।
3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतिम और उच्चतम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles) में व्यक्ति बाहरी नियमों या कानूनों की परवाह किए बिना अपने स्वयं के विवेक और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे कानून समाज के नियमों के विरुद्ध क्यों न हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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बाल विकास के परिप्रेक्ष्य में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की किस अवस्था में व्यक्ति यह मानता है कि सामाजिक नियमों का पालन करना समाज में सुव्यवस्था बनाए रखने और कर्तव्य का पालन करने के लिए अनिवार्य है, जो कि 'उत्तर-रूढ़िगत' या 'पारंपरिक' स्तर का हिस्सा है?
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्यवर्ती क्षेत्रों में बोली जाने वाली विभिन्न बोलियों तथा उनके मुख्य भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. भोजपुरी (Bhojpuri) - बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, गोरखपुर और देवरिया (यह बिहार की सीमा से लगे जिलों में प्रमुखता से बोली जाती है और इसका उद्गम शौरसेनी अपभ्रंश से माना जाता है)
2. अवधी (Awadhi) - लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर, रायबरेली, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ (यह मध्य उत्तर प्रदेश का क्षेत्र है जिसका विकास अर्द्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है)
3. ब्रजभाषा (Brajbhasha) - आगरा, मथुरा, अलीगढ़, एटा और हाथरस (यह क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है जहाँ सूरदास और बिहारी ने अपनी रचनाएँ लिखीं)
4. बुंदेली (Bundeli) - झाँसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर और बाँदा (यह दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश का पठारी क्षेत्र है जहाँ अर्धमागधी अपभ्रंश का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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