बुद्धि: अवधारणा एवं सिद्धांत
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'बुद्धि के समकालीन बहुआयामी सिद्धांतों' के संदर्भ में, रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि का त्रितंत्र सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) के अंतर्गत वर्णित तीन प्रमुख उप-सिद्धांतों—'घटकाय या विश्लेषणात्मक बुद्धि' (Componential/Analytical Intelligence), 'अनुभवी या सृजनात्मक बुद्धि' (Experiential/Creative Intelligence), और 'व्यावहारिक या प्रासंगिक बुद्धि' (Contextual/Practical Intelligence)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप, तथा जॉन कैरोल (John Carroll) और रेमंड कैटल (Raymond Cattell) द्वारा प्रतिपादित 'तरल और ठोस बुद्धि सिद्धांत' (Fluid and Crystallized Intelligence Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक समस्या-समाधान आधारित समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित मूल्यांकन (Differentiated Assessment) और विद्यार्थियों में वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने की क्षमताओं के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
रॉबर्ट स्टर्नबर्ग का 'बुद्धि का त्रितंत्र सिद्धांत' बुद्धि को सूचना प्रक्रमण (Information Processing) के तीन पहलुओं—विश्लेषणात्मक, सृजनात्मक (अनुभवी) और व्यावहारिक—के रूप में देखता है। वहीं, रेमंड कैटल का 'तरल और ठोस बुद्धि सिद्धांत' जन्मजात तर्क शक्ति (Fluid Intelligence) और सांस्कृतिक रूप से अर्जित ज्ञान/कौशलों (Crystallized Intelligence) के बीच अंतर करता है। स्टर्नबर्ग का विश्लेषणात्मक घटक कैटल के संचित ज्ञान (ठोस बुद्धि) से और अनुभवी घटक नवीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता (तरल बुद्धि) से निकटता से जुड़ा हुआ है। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इन सिद्धांतों का समेकित उपयोग शिक्षकों को विविध शिक्षण शैलियों और विभेदित मूल्यांकन (Differentiated Assessment) की योजना बनाने में सहायता करता है।
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