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विकास के क्षेत्र सभी देखें (969) शारीरिक एवं गामक विकास3 संज्ञानात्मक विकास429 सामाजिक विकास21 संवेगात्मक विकास109 भाषा विकास23 नैतिक एवं चारित्रिक विकास384
विकास के प्रमुख सिद्धांतकार सभी देखें (1928) जीन पियाजे519 लेव वाइगोत्स्की403 लॉरेंस कोहलबर्ग19 एरिक एरिक्सन37 जेरोम ब्रूनर76 अल्बर्ट बंडूरा134 सिगमंड फ्रायड278 मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद406 अन्य सिद्धांतकार (गेसेल, ब्रोनफेनब्रेनर, हॉल, आदि)56
अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
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वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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सृजनशीलता (Creativity)
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,279 times
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कक्षा में 'सृजनात्मकता' (Creativity) को बढ़ावा देने के लिए शिक्षक को किस प्रकार के प्रश्नों को प्राथमिकता देनी चाहिए?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों के भीतर सृजनात्मकता (Creativity) और मौलिक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को हमेशा अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) पर आधारित प्रश्नों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अपसारी प्रश्न वे होते हैं जिनका कोई एक निश्चित या रूढ़िबद्ध उत्तर नहीं होता है, बल्कि विद्यार्थी अपनी कल्पना शक्ति, अनुभवों और तार्किक क्षमताओं के आधार पर अनेक प्रकार के नए और मौलिक उत्तर या समाधान प्रस्तुत करते हैं। यह प्रक्रिया बच्चे के मस्तिष्क को स्वतंत्र रूप से सोचने, विभिन्न दृष्टिकोणों से विचार करने और लीक से हटकर (Out-of-the-box) समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती है। बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के अनुसार, सृजनात्मकता और अपसारी चिंतन एक-दूसरे के पर्याय माने जाते हैं क्योंकि दोनों ही बहुआयामी दृष्टिकोण से जुड़े हैं।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • अपसारी प्रश्न (Divergent Questions): ये खुले अंत वाले (Open-ended) होते हैं जो नवीनता और विविधता को प्रोत्साहित करते हैं।
  • तथ्यात्मक और बंद-अंत प्रश्न (Factual & Closed-ended): ये केवल स्मरण शक्ति (Memory) और अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं, जहाँ उत्तर पहले से निश्चित होता है।
  • बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple-choice): सामान्यतः संकीर्ण और पूर्व निर्धारित विकल्पों तक सीमित होते हैं, जो सृजनात्मकता के विकास के लिए कम प्रभावी हैं।
  • गिलफोर्ड का सिद्धांत: जे.पी. गिलफोर्ड ने सृजनात्मकता के संदर्भ में अपसारी चिंतन को सबसे महत्वपूर्ण घटक बताया है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में गिलफोर्ड और टॉरेंस के सिद्धांतों के अनुसार, सृजनात्मक बालकों की पहचान उनके अपसारी चिंतन कौशल से की जाती है। अधिक जानने के लिए पढ़ें सृजनात्मकता एवं शिक्षण अधिगम प्रक्रिया।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में सृजनात्मकता और चिंतन के प्रकारों पर आधारित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। जब प्रश्न 'क्यों', 'कैसे', या 'यदि ऐसा हो तो क्या होगा' शैली में पूछे जाते हैं, तब वे अपसारी प्रकृति के होते हैं। शिक्षकों को चाहिए कि वे कक्षा में ऐसा प्रजातांत्रिक और लचीला वातावरण प्रदान करें जहाँ छात्र बिना किसी भय के अपने मौलिक विचार रख सकें। अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) जहाँ एक सही उत्तर पर केंद्रित होता है, वहीं अपसारी चिंतन विभिन्न संभावनाओं के जाल बुनता है जो सृजनशीलता की रीढ़ है।

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अगला प्रश्न → शिक्षा में नाटक और कला के प्रयोग से ........ होता है। ← पिछला प्रश्न कक्षा में 'सृजनात्मकता' (Creativity) बढ़ाने के लिए कौन सा…

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