अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ
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'अधिगम की रणनीतियाँ और मेटाकॉग्निशन (Metacognition)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जॉन फ्लैवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'मेटाकॉ संज्ञान और मेटाकॉग्निटिव ज्ञान' (व्यक्ति, कार्य और रणनीतिक चर) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'रोस्ट्राल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Brodmann Area 10), और 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC) के बीच स्व-निगरानी (Self-Monitoring), स्व-नियमन (Self-Regulation), और त्रुटि का पता लगाने (Error Detection) की सक्रियण गतिकी, तथा एन ब्राउन (Ann Brown) के 'मेटाकॉग्निटिव विनियमन और कार्यकारी नियंत्रण' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मेटाकॉग्निटिव-स्केफोल्डिंग पेडागोजी (Metacognitive-Scaffolded Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-निर्देशित अधिगम, संज्ञानात्मक लचीलेपन व समग्र समस्या-समाधान क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (a) है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, 'मेटाकॉग्निशन' (अपने स्वयं के संज्ञान के बारे में ज्ञान और नियंत्रण) मुख्य रूप से डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (DLPFC) और एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स (ACC) द्वारा नियंत्रित होता है। जॉन फ्लैवेल और एन ब्राउन के सिद्धांतों के अनुसार, जब छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया की निगरानी (Monitoring) और विनियमन (Regulation) करते हैं, तो ये मस्तिष्क क्षेत्र सक्रिय होते हैं। आधुनिक समावेशी शिक्षा में, मेटाकॉग्निटिव-स्केफोल्डिंग पेडागोजी का उपयोग करने से विद्यार्थियों में स्व-निर्देशित अधिगम, संज्ञानात्मक लचीलेपन और उच्च-क्रम के समस्या-समाधान कौशल का विकास होता है, जो UPTET बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के पाठ्यक्रम के अंतर्गत अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
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