सृजनशीलता (Creativity)
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'सृजनात्मकता और divergent thinking' (Creativity and Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जोसफ गिल्फोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन के आयाम' (फ्लेक्सिबिलिटी, फ्लुएंसी, ओरिजिनलिटी और एलैबोरेशन) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एक्सेक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (Executive Control Network - ECN), और 'सेलियंट नेटवर्क' (Salience Network) के बीच वैचारिक लचीलेपन, अंतर्दृष्टि (Insight Generation), और नवीनता प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डी बोनो (Edward de Bono) के 'पार्श्वीय चिंतन' (Lateral Thinking) मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में समस्या-समाधान कौशल, मुक्त-अंत वाले प्रश्नों (Open-ended Questions) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
सृजनात्मकता (Creativity) और अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) का न्यूरो-संज्ञानात्मक अध्ययन यह दर्शाता है कि मस्तिष्क का 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) नवीन और कल्पनाशील विचारों को उत्पन्न करने में सहायक होता है, जबकि 'एक्सेक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (ECN) उन विचारों का मूल्यांकन और चयन करता है। जोसफ गिल्फोर्ड (J.P. Guilford) के अपसारी चिंतन के आयाम (जैसे लचीलापन, धाराप्रवाहता और मौलिकता) तथा एडवर्ड डी बोनो का पार्श्वीय चिंतन बच्चों में समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ाते हैं। प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' के तहत खुले और चुनौतीपूर्ण प्रश्न पूछकर बच्चों की इन तंत्रिका प्रणालियों और संज्ञानात्मक क्षमताओं का समग्र विकास किया जा सकता है।
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