मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवीय आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत' (Theory of Human Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी सर्वोच्च क्षमताओं, रचनात्मकता, आत्म-विकास और आंतरिक संभावनाओं को पूरी तरह से साकार करने की तीव्र मनोवैज्ञानिक ड्राइव का अनुभव करता है, जो शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान जैसी सभी बुनियादी और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के संतुष्ट होने के बाद शीर्ष स्तर पर प्रकट होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की उच्च-स्तरीय प्रेरणा, सृजनात्मकता के संवर्धन और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
अब्राहम मास्लो के 'मानवीय आवश्यकताओं के पदानुक्रम' के अनुसार, उच्च-स्तरीय आवश्यकताएँ जैसे कि 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) तभी सक्रिय होती हैं जब नीचे के स्तर की बुनियादी आवश्यकताएँ (जैसे- शारीरिक आवश्यकताएँ, सुरक्षा, अपनेपन और आत्म-सम्मान) संतोषजनक रूप से पूरी हो जाती हैं। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में, यदि किसी छात्र की मूलभूत भावनात्मक और शारीरिक आवश्यकताएँ पूरी नहीं होती हैं, तो उसका ध्यान उच्च-स्तरीय अधिगम और रचनात्मकता पर केंद्रित नहीं हो पाता है। अतः विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक अवधारणा के वैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता है।
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अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के 'मानवीय आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत' (Theory of Human Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की आवश्यकता—अर्थात् 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण की आवश्यकता' (Need for Self-Actualization)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता, प्रतिभा और अंतर्निहित संभावनाओं का पूर्ण विकास और सदुपयोग करने के लिए प्रेरित होता है, और यह आवश्यकता तभी सक्रिय होती है जब उसकी पिछली सभी शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान संबंधी आवश्यकताएं संतोषजनक रूप से पूरी हो चुकी होती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, रचनात्मकता के विकास और उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी मानवतावादी अभिप्रेरणा सिद्धांत / आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी सभी न्यूनता जनित आवश्यकताओं (Deficiency Needs) को संतुष्ट करने के पश्चात् अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, योग्यताओं, रचनात्मकता और व्यक्तिगत पोटेंशियल का अधिकतम और यथार्थवादी विकास व उपयोग करके अपने जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक अभिप्रेरणा, सृजनात्मकता और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवीय आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च और अंतिम मनोवैज्ञानिक स्तर—'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)—जिसे उस अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति अपनी पूर्ण आंतरिक क्षमताओं, सृजनात्मक संभावनाओं और वैयक्तिक विकास के चरम शिखर को प्राप्त कर लेता है और अपनी विशिष्ट पहचान को सार्थक रूप से चरितार्थ करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय सृजन, आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation), व्यक्तिगत स्वायत्तता और समग्र व्यक्तित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' यानी 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-वास्तविकीकरण या स्व-सिद्धि' (Self-Actualization)—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी समस्त आंतरिक योग्यताओं, सृजनात्मक क्षमताओं और पूरी मानवीय संभावनाओं का पूर्ण रूप से विकास और सदुपयोग करने के लिए प्रेरित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, आंतरिक अभिप्रेरणा और उच्च-स्तरीय अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Theory of Human Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी सर्वोच्च क्षमताओं, रचनात्मकता, आत्म-विकास और आंतरिक संभावनाओं को पूरी तरह से साकार करने की अपनी अंतःप्रेरणा को संतुष्ट करता है, जो पदानुक्रम में सबसे शीर्ष आवश्यकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, उच्च-स्तरीय प्रेरणा और रचनात्मकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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