समायोजन एवं रक्षा-युक्तियाँ
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नॉर्मन मनूएल (Norman Munn) एवं अन्य मनोवैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषित **'समायोजन की प्रत्यक्ष विधियाँ' (Direct Methods of Adjustment)** के अंतर्गत प्रतिपादित **'लक्ष्य-विश्लेषण और विकल्प अन्वेषण' (Goal Analysis and Alternative Exploration)** की प्रक्रिया—जिसके तहत कोई व्यक्ति किसी आंतरिक या बाह्य बाधा के कारण उत्पन्न कुंठा (Frustration) की स्थिति में, अपनी विफलता के कारणों का तार्किक, बौद्धिक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करता है तथा अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए नए वैकल्पिक मार्ग या रणनीतियाँ विकसित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समस्या-समाधान कौशल, संवेगात्मक स्थिरता और रचनात्मक अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
समायोजन की प्रत्यक्ष विधियाँ (Direct Methods of Adjustment) उन conscious (चेतन) और rational (तार्किक) प्रयासों को संदर्भित करती हैं जिनका उपयोग व्यक्ति तब करता है जब वह अपने लक्ष्य प्राप्ति में किसी बाधा या कुंठा का सामना करता है। 'लक्ष्य-विश्लेषण और विकल्प अन्वेषण' के तहत व्यक्ति समस्या की प्रकृति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करता है, अपनी रणनीतियों में संशोधन करता है तथा नए विकल्पों को अपनाता है। यह रक्षा तंत्र (Defense Mechanisms) के विपरीत वास्तविकता पर आधारित होता है और विद्यार्थी के संज्ञानात्मक लचीलेपन, समस्या-समाधान कौशल तथा संवेगात्मक स्थिरता को सुदृढ़ करता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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आधुनिक भारत के इतिहास में 'संन्यासी विद्रोह' (Sannyasi Rebellion) और अन्य समकालीन आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संन्यासी विद्रोह मुख्य रूप से बंगाल के पूर्णिया, तिरहुत और रंगपुर क्षेत्रों में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी राजस्व नीतियों, तीर्थयात्रा कर लगाने तथा 1770 के भयंकर अकाल के दौरान राहत कार्यों की उपेक्षा के विरुद्ध भड़का था।
2. इस विद्रोह में हिंदू संन्यासियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विस्थापित किसानों, कारीगरों और 'फकीर' कहे जाने वाले मुस्लिम धार्मिक सुधारकों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया था, जिनका नेतृत्व मजनू शाह और देवी चौधुरानी जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों ने किया था।
3. ब्रिटिश गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने इस विद्रोह का पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से दमन किया और किसी भी सैन्य बल का प्रयोग किए बिना केवल सामाजिक सुधारों के माध्यम से संन्यासियों को मुख्यधारा में शामिल कर लिया था।
4. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास 'आनंदमठ' इसी संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें देशभक्ति का अमर गीत 'वंदे मातरम्' पहली बार सामने आया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरलों तथा वायसराय के कार्यकाल में घटित प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं और नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड विलियम बेंटिंक - वर्ष 1829 का सती प्रथा निषेध कानून (नियम XVII) तथा ठगी प्रथा का पूर्ण दमन (कर्नल स्लीमैन की सहायता से)।
2. लॉर्ड डलहौजी - वर्ष 1856 का 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' तथा अवध का कुशासन के आधार पर ब्रिटिश साम्राज्य में विलय।
3. लॉर्ड लिटन - वर्ष 1878 का वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (Vernacular Press Act) तथा आर्म्स एक्ट (Arms Act) का पारित होना, जिसे 'गैंगिंग एक्ट' भी कहा गया।
4. लॉर्ड कर्जन - वर्ष 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (Indian Universities Act) तथा प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम का पारित होना।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म पूर्णतः सही सुमेलित है/हैं?
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जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'असुरक्षित-प्रतिरोधी संलग्नता' (Insecure-Resistant Attachment / Ambivalent Attachment)** की अवधारणा—जिसके तहत शिशु अपनी देखभाल करने वाले (Primary Caregiver) के प्रति अत्यधिक चिपके रहने वाला व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, परंतु जब वह वापस लौटता है तो वे गुस्से, विरोध और सांत्वना पाने के बावजूद उसे अस्वीकार करने जैसे द्वंद्वपूर्ण (Ambivalent) और विरोधाभासी संवेगात्मक प्रतिक्रियाएं देते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, विश्वास के संकट और कक्षा में सामाजिक-भावनात्मक समायोजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytical Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'रक्षा तंत्र या रक्षा युक्तियाँ' (Defense Mechanisms)** में से एक प्रमुख युक्ति **'प्रतिगमन' (Regression)** की अवधारणा—जिसके तहत अत्यधिक तनाव, चिंता, निराशा या आघात की स्थिति में व्यक्ति (विशेषकर बच्चे) अपने वर्तमान विकासात्मक स्तर से पीछे हटकर किसी पूर्ववर्ती या बचपन के अधिक सुरक्षित, निर्भर और अपरिपक्व विकासात्मक चरण के व्यवहारों (जैसे अंगूठा चूसना, तुलाना, अत्यधिक रोना या जिद करना) का पुनः प्रदर्शन करने लगता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक समायोजन, तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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