नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights)—जिसे उस उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional Level) के अंतर्गत परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति यह समझता है कि नियम और कानून समाज के कल्याण के लिए बनाए गए एक लचीले अनुबंध हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या सामाजिक न्याय के खिलाफ जाता है, तो उसमें परिवर्तन किया जा सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक विवेक और न्यायपरक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights Orientation) उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Stage 5) का हिस्सा है। इस स्तर पर बालक या व्यक्ति यह समझता है कि कानून सामाजिक भलाई और आपसी सहमति के लिए बनाए गए हैं। यदि कोई नियम समाज के मौलिक अधिकारों या न्याय के विरुद्ध है, तो लोकतांत्रिक तरीकों से उसमें बदलाव किया जा सकता है। यह विद्यार्थियों में तार्किक विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायपूर्ण चिंतन के विकास में मदद करता है।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए मनोवैज्ञानिक कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग का प्रतिमान पुरुषों के न्याय-उन्मुख (Justice-oriented) दृष्टिकोण पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और जिम्मेदारी' (Care and Responsibility) के संदर्भात्मक और संबंधात्मक दृष्टिकोण पर आधारित होता है। गिलिगन के इस नारीवादी और विकासात्मक परिप्रेक्ष्य के अनुसार, महिलाओं के नैतिक तर्क का सर्वोच्च और परिपक्वतम स्तर कोहलबर्ग के किस स्तर या वैचारिक प्रतिमान से सीधे तौर पर भिन्नता रखता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अनुसार, पारंपरिक नैतिकता के स्तर (Conventional Level) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण यानी 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) की सबसे प्रमुख और विशिष्ट विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के चरम चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून के अंधे अनुपालन के बजाय अपने स्वयं के अंतःकरण, सार्वभौमिक मानवाधिकारों, न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के आंतरिक रूप से चयनित स्व-निर्धारित नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही और गलत का निर्णय करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक नैतिक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वायत्त निर्णय-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality)—जिसे उस उन्नत नैतिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति पारंपरिक सामाजिक नियमों या बाहरी अधिकारों की आँख मूंदकर पालना करने के बजाय अपने स्वयं के अंतःकरण (Conscience), सार्वभौमिक मानवीय न्याय, मानवाधिकारों और आंतरिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही और गलत का निर्णय करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तर्क (Moral Reasoning), स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)—जिसे उस उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional Level) की पांचवीं अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून एक सामाजिक अनुबंध (Social Contract) के रूप में लचीले होने चाहिए, जिन्हें समाज के कल्याण और व्यक्तिगत मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक रूप से बदला जा सकता है, न कि वे कठोर या अपरिवर्तनीय अंतिम सत्य होते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तार्किकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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