थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि
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'बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र' के अंतर्गत 'अधिगम के सिद्धांत' (Theories of Learning) के संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत सीखने के तीन प्रमुख प्राथमिक नियमों—अर्थात 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness), 'अभ्यास का नियम' (Law of Use and Disuse), और 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—तथा उनके साथ प्रतिपादित पाँच गौरण (द्वितीयक) नियमों के मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
थॉर्नडाइक (Edward L. Thorndike) को शैक्षिक मनोविज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने सीखने के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism) का प्रतिपादन किया। अपने इस सिद्धांत के अंतर्गत उन्होंने सीखने के तीन प्राथमिक नियम दिए: (1) तत्परता का नियम (Law of Readiness), (2) अभ्यास का नियम (Law of Use and Disuse), और (3) प्रभाव या संतोष का नियम (Law of Effect)। इसके अतिरिक्त उन्होंने पांच गौरण (द्वितीयक) नियम भी प्रतिपादित किए, जिनमें बहु-अनुक्रिया का नियम (Law of Multi-Response), आंशिक क्रिया का नियम, मनोवृत्ति का नियम, आत्मीकरण का नियम, और सहचर का नियम शामिल हैं। विकल्प (a), (b), और (c) में दिए गए सभी कथन थॉर्नडाइक के इन नियमों की वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक विशेषताओं का बिल्कुल सटीक वर्णन करते हैं। अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।
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थॉर्नडाइक के सीखने के सिद्धांत (Trial and Error Theory) के संदर्भ में…
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'अधिगम स्थानांतरण (Transfer of Learning)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'सेंसरी-मोटर कॉर्टेक्स' (Sensory-Motor Cortex), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) और 'एसोसिएशन एरिया' (Association Areas) के बीच न्यूरल पाथवे शेयरिंग, सिनैप्टिक ओवरलैप और पुराने कौशलों के तंत्रिका नेटवर्क के पुनरुपयोग की सक्रियण गतिकी, तथा चार्ल्स जुड (Charles Judd) द्वारा प्रतिपादित 'सामान्यीकरण का सिद्धांत' (Theory of Generalization) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, संदर्भ-आधारित रचनावादी शिक्षाशास्त्र (Context-based Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में सीखी गई संकल्पनाओं के वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग, संज्ञानात्मक लचीलेपन व समग्र समस्या-समाधान दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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